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रामपुर प्रकरण: बरेली के खनन अधिकारी भी फंस गए

Fri, 15 Dec 2017 02:10 AM IST
बरेली।
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रामपुर के दढ़ियाल में आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी हुसैन को बालू भंडारण का लाइसेंस दिए जाने के मामले में बरेली के खनन अधिकारी शैलेंद्र कुमार भी फंस गए हैं। हाईकोर्ट से रामपुर के डीएम शिवसहाय अवस्थी ही नहीं शैलेंद्र कुमार पर भी कार्र्रवाई तय मानी जारी है। 
कस्बा दढ़ियाल के मकसूद हुसैन की रिट पर हाईकोर्ट ने 24 अगस्त, 2015 को अवैध तरीके से खनन करने वाले हुसैन पर कार्रवाई करने को कहा था। तत्कालीन डीएम ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसी बीच हुसैन को शैलेंद्र कुमार की संस्तुति पर बालू भंडारण का लाइसेंस भी जारी कर दिया गया। इसके बाद मकसूद ने फिर से हाईकोर्ट में रिट दायर कर आरोप लगाया कि प्रशासन कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहा है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेकरदोषी के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश कर दिए। डीएम शिवसहाय अवस्थी ने हुसैन पर जुर्माना डाला और उसके खिलाफ अन्य कार्रवाई भी हुई, लेकिन हाईकोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने मामले में सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। इसमें बरेली के खनन अधिकारी पर भी कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है। 
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पुलिस की मेहरबानी से होता है खनन
 बरेली। जिले भर में पुलिस की मेहरबानी से ही अवैध खनन हो रहा है। नेताओं का आशीर्वाद मिलने से खनन करने वालों का काम तो चल जाता है, लेकिन शहर में अपना धंधा फैलाने के लिए खनन करने वालों को पुलिस से साठगांठ करनी होती है। इसके बाद ही माफिया खनन कर पाते हैं। शहर में भराव के लिए मिट्टी की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। सीबीगंज का सराय तलफी, रोठा आदि इलाके से सबसे ज्यादा खनन हो रहा है। पुलिस की मिलीभगत से ही खनन का धंधा चलता है। रेता का खनन चौबारी, फरीदपुर के गजनेरा, बहेड़ी के टियूला, बंजरिया, ठकिया ठाकुरान, मोहम्मदपुर, आंवला के अंजनी और मीरगंज के गौतारा गांव से होता है। यहां प्रशासन अभी तक पट्टे नहीं दे पाया है, लेकिन पुलिस से मिलीभगत के जरिए अवैध खनन हो रहा है 
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50 ट्राली मिट्टी के खनन की परमीशन एडीएम देंगे
बरेली। डीएम राघवेंद्र सिंह ने किसानों को राहत देने के लिए 50 ट्राली मिट्टी का खनन करने की परमीशन करने की जिम्मेदारी एडीएम (फाइनेंस) को दे दी है, लेकिन शर्त यह होगी कि खनन करके किसान को यह मिट्टी अपने प्रतिष्ठान या खेत खलियान में ही डालनी होगी, वह मिट्टी को बाजार में नहीं बेचेंगे। जिस खेत से किसान को मिट्टी उठानी है, उसके सभी मालिकों की एनओसी बतौर शपथ पत्र लेकर एडीएम को देनी होगी। 
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