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Bareilly News: रामगंगानगर... भूखंड बेचकर बीडीए हुआ मालामाल, सुविधाएं नदारद, घुट रहे खरीदार

Thu, 21 Aug 2025 12:38 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

रामगंगानगर कॉलोनी की सड़कें-नालियां क्षतिग्रस्त हैं। रोशनी नदारद है। सुरक्षा तक का इंतजाम नहीं है। सेक्टर-नौ के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर मकान बनाया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। इससे अच्छा कहीं और भूखंड खरीद लेते। 
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रामगंगानगर आवासीय योजना की कॉलोनी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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दूसरों को नियोजित विकास का पाठ पढ़ाने वाला बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) खुद इसका पालन नहीं कर रहा। रामगंगानगर आवासीय योजना में भूखंड बेचकर प्राधिकरण ने करोड़ों रुपये कमाए, पर खरीदारों को सुविधाएं मुहैया कराने में फिसड्डी साबित हुआ। कॉलोनी की सड़कें-नालियां क्षतिग्रस्त हैं। रोशनी नदारद है। सुरक्षा तक का इंतजाम नहीं है। सेक्टर-नौ के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। सुविधाएं मुहैया कराने के बजाय जिम्मेदार दूसरी योजनाओं में प्लॉटिंग कराने में व्यस्त हैं।

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चार साल पूर्व बसाई गई रामगंगानगर आवासीय योजना की पड़ताल में यह तस्वीर उभरकर सामने आई। बुधवार दोपहर एक बजे टीम सेक्टर-नौ (सत्यम एन्क्लेव) के प्रवेश द्वार पर पहुंची। वहां बने गार्ड रूम में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। कॉलोनी के अंदर भी नागरिक सुविधाएं शून्य मिलीं। पानी की टंकी बनी है, पर जलापूर्ति नहीं होती। नलकूप के दरवाजे पर ताला लटक रहा है, जबकि प्राधिकरण प्रत्येक घर में टंकी से जलापूर्ति का दावा कर रहा है।

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साफ-सफाई नहीं होने से पूरी कॉलोनी झाड़ियों और मच्छरों की गिरफ्त में है। सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। चोक नालियों में बारिश का पानी भरा है। स्ट्रीट लाइटें नहीं जलतीं। लोगों ने खुद के खर्च पर सुरक्षा का इंतजाम कर रखा है। नागरिकों का कहना है कि उन्होंने अच्छी सुविधाओं वाली आवासीय कॉलोनी समझकर लाखों रुपये खर्च कर भूखंड खरीदे और मकान बनवाए, लेकिन यहां असुविधाओं का बोलबाला है। खरीदार खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

पार्क के नाम पर खाली प्लॉट, उसमें भी झाड़ियां
कॉलोनी में पार्क के नाम पर खाली प्लॉट है। इसमें पार्क जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। वहां झाड़ियों के बीच ट्रांसफार्मर रखा है। वहां आठ हाईमास्ट लाइटें लगी हैं, पर वे जलती नहीं हैं। कॉलोनी के लोगों ने बताया कि सुरक्षा के लिए उन्होंने 500 रुपये रोज के हिसाब में निजी गार्ड रखे हैं। 

सफाई के नाम पर वसूली करते हैं बीडीए कर्मी
कॉलोनी निवासी ब्रजेश कुमार ने बताया कि घर के सामने घना जंगल है। यहां घर बनाकर परेशान हैं। न तो पानी की सुविधा है न ही सफाई का इंतजाम। बीडीए कर्मी साफ-सफाई के नाम पर प्रत्येक घर से 500 रुपये वसूलते हैं। अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि 33 लाख रुपये खर्च कर सेक्टर-नौ में घर बनाया, लेकिन यहां पानी तक का इंतजाम नहीं है। कई बार बीडीए दफ्तर गए। पानी टंकी चालू करने की मांग की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। 
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डॉ. रविंद्र कुमार यादव ने कहा कि सेक्टर-नौ में करीब 100 मकान बने हैं। 60 मकानों में परिवार भी रह रहे हैं। यहां पानी, रोशनी, सफाई नहीं है। ज्यादातर व्यवस्थाएं खुद जुटानी पड़ती हैं। नालियां बाहर नहीं जुड़ी हैं। सीवर भी चालू नहीं है। राम निवास पाठक ने कहा कि सेक्टर-नौ में दो साल से रह रहे हैं। हाल में मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान मुख्य मार्ग की सफाई हुई थी। लोगों ने खुद के खर्चे पर मच्छरों से बचने के लिए दवाई का छिड़काव कराया था। 

अफसरों की दलील
बीडीए के मुख्य अभियंता एपीएन सिंह ने कहा कि सभी सेक्टरों में टंकी से जलापूर्ति है। सेक्टर-नौ में लोहिया आवास पांच साल पहले से बने हैं। सभी लोग टंकी का पानी इस्तेमाल करते हैं। कहीं समस्या है तो उसे दिखवाएंगे। नलकूप पर स्टाफ और सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारी लगे हैं। 

बीडीए उपाध्यक्ष मनिकंडन ए. ने कहा कि टैंक का निर्माण चल रहा है। यह काम पूरा होने पर अन्य सभी दिक्कतें भी दूर करा दी जाएंगी।

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