बरेली। अधूरी पड़ी रामगंगा बैराज सिंचाई परियोजना के लिए बजट का सूखा लंबा खिंचता जा रहा है। परियोजना के संबंध में दिल्ली के केंद्रीय जल आयोग में मंगलवार को होने वाली बैठक टल गई है। अगली बैठक की तिथि अभी तय नहीं है हालांकि, उम्मीद है कि नवंबर में फिर से मंथन होगा। परियोजना के अधर में लटकने से बरेली और बदायूं के किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्रीय जल आयोग ने 18 जून 2009 के सिंचाई परियोजना अनुमोदित की थी। काम शुरू हुआ पर रफ्तार धीमी रही और परियोजना समय पर पूरी न होने से लागत बढ़ गई। 2011-12 में परियोजना पुनरीक्षित हुई और लागत 597.78 करोड़ रुपये पहुंच गई। लागत बढ़ने पर भी निर्माण में तेजी नहीं दिखाई गई। यह परियोजना अब भी अधूरी है।
किसान संगठन भी इसे लेकर आंदोलित हैं। शासन स्तर से तीसरी बार 2023 में परियोजना को पुनरीक्षित कराया गया। अब लागत 3299.89 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इसी लागत के एस्टीमेट का परीक्षण केंद्रीय जल आयोग कर रहा है। परियोजना को लेकर कुछ आपत्तियां थीं। इनके निराकरण के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं को मंगलवार को दिल्ली जाना था लेकिन बैठक टल गई।
किसान एकता मंच का प्रतिनिधिमंडल अधिशासी अभियंता से मिला
बरेली। किसान एकता संघ का प्रतिनिधिमंडल किसान नेता डॉ. रवि नागर के नेतृत्व में अधिशासी अभियंता नीरज कुमार लांबा से मिला। अधिशासी अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि उन्हें आए मात्र सात दिन हुए हैं। वह परियोजना के बारे में पूरी जानकारी लेंगे। इसके बाद ही आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। डॉ. रवि नागर ने बताया कि 17 अक्तूबर को एक प्रतिनिधिमंडल सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता से मिलेगा। अगर फिर भी काम शुरू नहीं होता है तो आंदोलन होगा। प्रतिनिधिमंडल में यज्ञ प्रकाश गंगवार, पंडित राजेश शर्मा, हरिओम राठौर शामिल रहे।
469 किलोमीटर नहरें बननी थीं, बनीं सिर्फ 100 किमी
आस-पास के 37 हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए यह परियोजना बनाई गई थी। योजना के तहत 469 किलोमीटर नहरें बननी थीं। इससे बदायूं के दातागंज क्षेत्र की ओर भी खेतों की प्यास बुझती। बैराज का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया, लेकिन यह जहां खत्म होता है, वहां बंधा व अन्य कार्य होने बाकी है। 100 किमी नहरें बन चुकी हैं, लेकिन अभी 350 किमी से ज्यादा नहरों का निर्माण बाकी है।
किसानों को आश्वासन दिया है कि मैं परियोजना में काम शुरू कराने के लिए विभाग और केंद्रीय जल आयोग तक पैरवी करूंगा। केंद्रीय जल आयोग में इस पर मंथन हो रहा है, जो आपत्तियां सामने आई हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। - नीरज कुमार लांबा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग