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Ramadan 2026: बरकत और रहमत का महीना रमजान शुरू, पहला रोजा आज; बरेली में छाई रौनक

Thu, 19 Feb 2026 11:21 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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चांद का दीदार करते दरगाह आला हजरत कमेटी के लोग - फोटो : कमेटी
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चांद दिखने के बाद बुधवार शाम सभी मसलकों ने रमजान मुबारक का एलान कर दिया। पहला रोजा बृहस्पतिवार को है। इसके साथ ही बरेली के मुस्लिम बहुल इलाकों में मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो गया। मस्जिदों में तरावीह की नमाज भी अदा की गई। इस्लामी माह रमजान का चांद देखने के लिए शाम से ही लोग खानकाहों, दरगाहों, मस्जिदों की छत और मैदानों पर एकत्र होने लगे थे। बादल होने की वजह से देर शाम तक बरेली में चांद नजर नहीं आया।

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दरगाह आला हजरत स्थित सुन्नी मरकज से चांद न दिखने की सूरत में एलान नहीं किया गया। बाद में परतापुर से चांद की शरई शहादत मिलने के बाद काजी-ए-हिंदुस्तान असजद रजा खां कादरी ने भी रमजान का एलान कर दिया। जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान ने बताया कि परतापुर चौधरी के मौलाना नूर हसन व उनके पुत्र सलाह उद्दीन और गुलाब नगर से शुएब रजा व अब्दुर रजा ने चांद की शरई गवाही दी है। इससे पूर्व देवबंद सिलसिले के मुफ्ती मोहम्मद मियां, शिया जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना हसीन हैदर नकवी ने भी चांद होने का एलान किया। 

बाजारों में छाई रमजान की रौनक
रमजान के चांद का एलान होते ही बाजारों की रौनक बढ़ गई। तरावीह पढ़कर निकले लोग इफ्तारी और सहरी के लिए खरीदारी करने सीधे बाजार पहुंचे। लोग हलीम कोरमे और कबाब पराठे का जायका लेते नजर आए। घर के लिए दूध, ब्रेड, बन, बटर, बिरयानी आदि की खरीदारी की। देर रात तक बाजार में रौनक बनी रही। यह नजारा खासतौर से पुराना शहर के सैलानी बाजार, कोहाड़पीर, किला बाजार आदि में देखने को मिला। 

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रमजान के पहले दिन से होती है रहमतों की बारिश  
मजान की बरकत और फजीलतों के बारे में अल्लाह के रसूल ने बहुत ही ज्यादा तारीफें बयान कीं है। यह इस्लामी महीना तीन अशरे में मुकम्मल होगा। इसमें हर एक अशरा दस दिनों का होता है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का है। 

 मदरसा अरबिया काशीफुल उलूम के मुंतजिम मुफ्ती मोहम्मद मियां ने बताया कि अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि रमजान का महीना शुरू होते ही जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। सरकश शयातीन (शैतान) को जकड़ दिया जाता है। रमजान के इस्तकबाल में पूरे साल जन्नत को सजाया जाता है और फरिश्ता एलान करता है कि ऐ खैर के तलबगारों खैर पर ध्यान दो और ऐ शर पर बगावत करने वालों बाज आ जाओ। 

हदीसे पाक में कहा गया है कि जिस तरह नेकियों का सबाब बढ़ता है इसी तरह गुनाह भी बढ़ते है। हजूर-ए- पाक ने कहा है कि रमजान का पहला अशरा यानि पहल दिन रहमत के हैं इसमें अल्लाह की जानिब से रहमतों का नुजूल होता है। अल्लाह ताला से सुबह और शाम दुआएं करनी चाहिए। अल्लाह ताला हम पर रहमतों का साया इनायत फरमाए। 
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