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रामगंगा पुल के पिलर गलत बनाए, प्रभारी मंत्री ने तेवर दिखाए तो 59 करोड़ आए

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बरेली। बदायूं रोड चौबारी में रामगंगा पुल के लिए 59 करोड़ के संशोधित एस्टीमेट को शासन ने मंजूरी दे दी है। 26 दिसंबर को प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा की समीक्षा बैठक के दौरान यह मामला उठा था कि रामगंगा पुल की डिजाइन सही से नहीं बनाई गई है। इसमें कई तकनीकी खामियां हैं। डिजाइन बदलने के नाम पर बजट का खेल हो रहा है। हालांकि प्रभारी मंत्री के तेवर दिखाने के बाद शासन से संशोधित बजट मिल गया है। बजट की कमी से इस पुल का निर्माण करीब छह माह से ठप पड़ा था। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि बजट स्वीकृत का शासनादेश मिल गया है। पुलिस के बाकी करीब 25 फीसदी काम को पूरा कराने के लिए निर्माण जल्द शुरू कराने की तैयारी शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह काम छह माह में पूरा कर लिया जाएगा।
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शासन ने वर्ष 2016 में रामगंगा पर पुराने पुल के साथ 670.88 मीटर लंबे नए पुल के निर्माण की स्वीकृत दी थी। 46.33 करोड़ की लागत से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट इस साल मार्च-अप्रैल आते-आते खर्च हो गया लेकिन पुल का करीब एक चौथाई काम अभी भी लटका हुआ है। सेतु निगम के अधिकारियों ने करीब 63.21 करोड़ का संशोधित एस्टीमेट शासन में पिछले साल भेजा था। इसकी स्वीकृति न मिलने से पुल का काम भी छह माह से ठप पड़ा हुआ था। आखिरकार शासन ने दो दिन पहले संशोधित एस्टीमेट के 59 करोड़ के बजट मंजूरी दे दी है। इससे पुल का अधूरा काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

डीएम ने शुरू कराई पिलर गलत बनाने की जांच
प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को आदेश दिया था कि वह इस मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार करें। इस मामले की जांच शुरू करते हुए डीएम ने सेतु निगम के अधिकारियों से इस प्रोजेक्ट संबंधी रिकार्ड मांग लिए हैं। इससे सेतु निगम के अफसरों में खलबली मची हुई है।
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‘रामगंगा पुल के लिए संशोधित बजट मिल गया है। पुल के शेष काम को जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके लिए अधीनस्थों को निर्देशित कर दिया गया है।’
- देवेंद्र सिंह, डीपीएम, सेतु निगम
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