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रक्षाबंधनः 29 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

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rakhi - फोटो : social media
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आयुष्मान योग करेगा दीर्घायु.. प्रीति योग बढ़ाएगा भाई-बहन का प्रेम
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन के अंतिम सोमवार को पड़ रहा रक्षाबंधन समसप्तक योग में होगा विशेष फलदायक
सर्वार्थ सिद्धि योग से पूरी होंगी भाई-बहन की मनोकामनाएं

बरेली। भाई और बहन के पवित्र प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन सावन के महीने की पूर्णिमा को मनाया जाएगा। भद्रा के बाद भी इस बार रक्षाबंधन का त्योहार विशेष शुभ योग और संयोग के बीच मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस रक्षाबंधन पर 29 साल दुर्लभ संयोग बना है। हालांकि, तमाम भाई-बहन जो एक-दूजे से दूर हैं, वे वर्चुअल तरीके से त्योहार मनाएंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक रक्षाबंधन इस बार एक तो सावन के अंतिम सोमवार को है, दूसरे इस दिन विशेष प्रीति योग, आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। दिन की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग में हो रही है इसलिए बहनें किसी भी समय भाइयों को राखी बांध सकेंगी। यह विशेष संयोग लगभग 29 साल बाद बन रहा है। राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। मान्यता है कि रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उसे राखी बांधी थी इसलिए उसका सर्वनाश हो गया। मगर इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा सुबह 9.29 बजे तक ही है। भद्रा सूर्यदेव की पुत्री हैं लेकिन किसी भी काम के लिए उन्हें शुभ नहीं माना जाता। इसलिए रक्षाबंधन सुबह 9.29 बजे के बाद ही मनाना शुभ रहेगा। दोपहर 1.35 बजे से शाम 4.35 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके बाद शाम 7.30 बजे से रात 9.30 बजे के बीच भी राखी बांधी जा सकती है।
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डॉ. शंखधार के अनुसार शुभ ग्रहों और नक्षत्रों की उपस्थिति भाई-बहन के प्रेम को और मजबूत बनाएगी। सर्वार्थ सिद्धि योग से रक्षाबंधन पर भाई-बहन दोनों की मनोकामनाएं पूरी होंगी और परस्पर प्रेम भी बढ़ेगा। आयुष्मान योग भाई की कलाई पर बंधने वाले रक्षासूत्र को मजबूत बनाकर उसे दीर्घायु प्रदान करेगा। वहीं सोमवार के दिन पूर्णिमा होने से भगवान शिव की कृपा भी रहेगी। मकर राशि का स्वामी शनि और सूर्य आपस में समसप्तक योग बना रहे हैं, शनि और सूर्य दोनों ही आयु बढ़ाते हैं।

शुभ मूूहूर्त

- सुबह 9.30 बजे से रात 9.57 बजे बांध सकते हैं राखी
  • - दोपहर दो बजे से शाम सात बजे तक चर, लाभ, अमृत योग
  • - सुबह 7.18 से अगले दिन सूर्योदय तक सर्वार्थ सिद्धि योग
  • - चंद्र का मकर राशि में प्रवेश के साथ ही प्रीति योग का निर्माण
  • - सुबह 6.40 बजे के बाद ही शुरू हो जाएगा आयुष्मान योग

ज्योतिषाचार्य का सुझाव

रक्षाबंधन ऑनलाइन मनाएं मगर विधि विधान का रखें ख्याल
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ज्योतिषाचार्य डॉ. शंखधार के अनुसार इस बार भले ही कोरोना के खतरे के कारण ऑनलाइन रक्षाबंधन मनाने पर जोर है मगर फिर भी विधि विधान का ध्यान रखना जरूरी है। भाई-बहन जब एक दूसरे को वीडियो कॉल करें तो बहनें पहले कृष्ण भगवान की तस्वीर सामने रखकर उन्हें राखी बांधे और मिठाई खिलाएं। भगवान की आरती उतारने और टीका लगाने के बाद ही भाई की आरती उतारें। इस दौरान रक्षासूत्र बांधते हुए ईश्वर को समर्पित मनोकामना करें ताकि भगवान का आशीर्वाद दोनों को समान रूप से मिल सके।
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