बरेली। राष्ट्रीय खेल हॉकी की स्थिति भले ही संसाधनों और कोच की कमी के दौर से गुजर रही हो, लेकिन इस खेल के प्रति कुछ पूर्व महिला खिलाड़ियों का समर्पण आज भी कम नहीं हुआ है। पूर्व महिला खिलाड़ी रजनी जोशी और ज्योति अपनी व्यस्त दिनचर्या से वक्त निकालकर स्टेडियम के उभरते खिलाड़ियों को गुर सिखा रही हैं। उन्हें सही दिशा दिखा रही हैं।
समय निकालकर पहुंच जाती हैं स्टेडियम पूर्व हॉकी खिलाड़ी रजनी जोशी वर्तमान में रेलवे के इज्जतनगर मंडल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने वर्ष 1991 में ही प्रतिस्पर्धी हॉकी खेलना छोड़ दिया था, लेकिन खेल के प्रति उनका लगाव आज भी जीवंत है। उन्हें वर्ष 2018-19 के प्रतिष्ठित रानी लक्ष्मीबाई राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। जब कभी भी रजनी को अपनी नौकरी और अन्य दायित्वों से समय मिलता है, वह सीधे स्टेडियम का रुख करती हैं। वहां हॉकी का ककहरा सीख रहे छोटे-छोटे बच्चों के बीच समय बिताना उन्हें सुकून देता है।
घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच हॉकी से जीवंत नाता
राष्ट्रीय स्तर की पूर्व हॉकी खिलाड़ी रहीं ज्योति ने विवाह के बाद घरेलू जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते नियमित रूप से खेल से थोड़ी दूरी जरूर बना ली थी, लेकिन वह अपने दिल से इस खेल को कभी दूर नहीं कर पाईं। वर्तमान में वह एक निजी विद्यालय में बच्चों को नृत्य सिखाने का कार्य कर रही हैं, लेकिन उनका दिल आज भी हॉकी के मैदान पर ही धड़कता है। जैसे ही उन्हें कोई अवसर मिलता है, वह मैदान का रुख करती हैं।