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कोरोना के दौरान मौत को नजदीक से देखा तो मिली लेखन की प्रेरणा : राजेश

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बरेली। शहर के विंडरमेयर थिएटर में राजकमल प्रकाशन का किताब उत्सव शनिवार को भी जारी रहा। इसमें शामिल हुए सेवानिवृत्त आईपीएस राजेश पांडेय ने सुहेल वहीद से बात करते हुए बरेली में तैनाती के दौरान लिखी अपनी किताब वर्चस्व के बारे में बताया। कहा कि कोरोना काल में लोगों को मरते देखा तो सोचा कि अगर मैं भी मर गया तो मेरे साथ ही पुलिस सेवा अनुभव भी खत्म हो जाएंगे। वहीं से मुझे लेखन की प्रेरणा मिली। यह 90 के दशक में यूपी और बिहार का आंखों देखा हाल बयां करती है। यह अपराध के राजनीतिकरण और राजनीति के अपराधीकरण का दस्तावेज है।
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अगले सत्र में वरिष्ठ लेखक अनीस अशफाक के उपन्यास ‘दुखियारे’ का लोकार्पण किया गया। लेखक के साथ मंच पर राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी, सुहेल वहीद और वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह मौजूद रहे। लोकार्पण के बाद सुहेल वहीद ने अनीस अशफाक से उपन्यास की विषयवस्तु और उनकी लेखन यात्रा पर बात की।
अनीस ने बताया कि इस उपन्यास में बहुत से चरित्र हैं, इसलिए शीर्षक बहुवचन में है। यह एक खानदान की कहानी है, जिसमें अनेक पीढ़ियों, स्मृतियों और लखनऊ शहर की संस्कृति की परतें खुलती हैं। उन्होंने लखनऊ के गलियों-मोहल्लों, प्रसिद्ध स्थलों, हवेलियों और शाही परिवारों की कहानियों का जिक्र किया। तीसरे सत्र में पुरुषोत्तम अग्रवाल की किताब ‘जन गोपाल’ पर चर्चा हुई। यह किताब मध्यकालीन भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को समझाती है। शनिवार को किताब उत्सव में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी भी पहुंचे। उनकी अब तक 50 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। बीते दिनों इस्लामी इतिहास पर आधारित उनकी पुस्तक तारीखे इस्लाम काफी प्रसिद्ध हो रही है।
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‘जिनसे शहर बरेली’ विशेष सत्र आज
किताब उत्सव में रविवार को विशेष सत्र ‘जिनसे शहर बरेली’ आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में उन व्यक्तित्वों को याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में बरेली की पहचान गढ़ी। सत्र में शहर की सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक परंपरा को आकार देने वाले लोगों पर वक्ता अपने संस्मरण और विचार साझा करेंगे। पंडित राधेश्याम कथावाचक समेत अन्य लोगो के बारे में बात होगी।
किसी भी नाटक का मंचन हर बार नया होता है : हृषिकेश सुलभ

चौथे दिन की शुरुआत मेंं कथाकार हृषिकेश सुलभ के निर्देशन में ‘पाठ-विश्लेषण’ विषय पर कार्यशाला से हुई। इस दौरान हृषिकेश सुलभ ने मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ व रतन थियाम के ‘कर्णभारम’ और ‘चक्रव्यूह’ से अंशपाठ करके पाठ-विश्लेषण की बारीकियां समझाईं। बताया कि एक नाटक को कई बार देखा जा सकता है। वही नाटक, वही निर्देशक, वही अभिनेता, लेकिन मंचन हर बार नया होता है।

आज होगा समापन

रविवार अपराह्न 2:45 बजे ‘किताबें हमें बनाती हैं’ विषय पर बातचीत से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसमें मृदुला गर्ग से पुरुषोत्तम अग्रवाल संवाद करेंगे। अगले सत्र में ‘बात किताब’ पर सफीना और विनय मिश्र की बात होगी। तीसरे सत्र में ‘रस्किन बॉन्ड की आत्मकथा अपनी धुन में’ पर किताब के अनुवादक प्रभात सिंह और संपादक रवि सिंह चर्चा करेंगे। अगले सत्र ‘बज़्म-ए-सुख़न’ में शारिक कैफी, आशु मिश्रा और अहमद अजीम शिरकत करेंगे। इसके बाद रंगकर्मी अजय चौहान, मुक्तिबोध की कविता ‘अंधेरे में’ का पाठ करेंगे।
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