इस तरह करते हैं टिकटों की कालाबाजारी
टिकटों की कालाबाजारी करने वाले मुख्य दलाल काउंटर पर खुद लाइन में नहीं लगते। वह जगह-जगह स्टेशनों पर इसके लिए स्थानीय युवकों या किशोरों को कुछ रुपये देकर रात से ही काउंटरों के बाहर लाइन में खड़ा कर देते हैं। सुबह आरक्षित टिकट काउंटर खुलते ही पहले से भरे हुए कई फॉर्म और विभिन्न पहचान पत्रों के जरिये लंबी दूरी के तत्काल टिकट हासिल कर लेते हैं। मुंबई, कोलकाता, पूर्वांचल, दक्षिण भारत के स्टेशनों के टिकटों को फिर यह यात्रियों को 500 से लेकर 1500 रुपये तक अतिरिक्त में बेचते हैं।
अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
रेलवे ने बीते दिनों ऑनलाइन टिकट प्रणाली में कई बदलाव करते हुए इसे ज्यादा सुरक्षित बनाया था। आधार वेरिफिकेशन और ओटीपी व्यवस्था को भी लागू किया गया। यह नियम भी लागू किया कि तत्काल टिकट बुकिंग खुलने के बाद अगले 30 मिनट तक एजेंट टिकट बुक नहीं कर सकेंगे।
इसके बाद से ही टिकटों की कालाबाजारी करने वालों के निशाने पर तत्काल काउंटर टिकट हैं। कई बार रेलवे के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पिछले दिनों ही बरेली के पीतांबरपुर स्टेशन पर तैनात रेलवे के मुख्य वाणिज्य सह आरक्षण पर्यवेक्षक शैलेंद्र दुबे को काउंटर टिकटों की कालाबाजारी में गिरफ्तार किया गया था।