फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामगंगा शिव मंदिर का रेलवे अफसरों ने गुंबद ढहाया तो माहौल गर्माया

विज्ञापन
तोड़फोड़ का विरोध करते लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन

संतों और विहिप नेताओं के साथ भीड़ ने रेलवे अफसरों को घेरकर सुनाई खरी खोटी

बिशारतगंज। रामगंगा किनारे स्थित वर्षों पुराने शिव मंदिर का आसपास इलाके के लोग चंदा करके जीर्णोद्धार करा रहे हैं, लेकिन रेलवे अफसरों ने मंदिर की जमीन को अपनी बताकर विवाद खड़ा कर दिया है। चार दिन पहले रेलवे अफसरों ने मंदिर का गुंबद ढहा दिया। अधिकारी शुक्रवार दोपहर फिर आरपीएफ के साथ पूरा मंदिर ढहाने पहुंचे तो हंगामा हो गया। वहां मौजूद जूना अखाड़े के साधुओं, विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों ने अधिकारियों का घेराव कर उन्हें खरी-खोटी सुनाई। बिशारतगंज पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाली। बाद में रेलवे अफसर सात दिन में मंदिर हटाने का नोटिस चस्पा करके चले गए। विहिप कार्यकर्ताओं ने रेल अधिकारियों पर संतों से अभद्रता और धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है।
विज्ञापन

बिशारतगंज थाना क्षेत्र में रामगंगा के बदायूं दिशा वाले किनारे पर दशकों पुराना शिव मंदिर है। कुछ दिन पहले मंदिर का कुछ हिस्सा गिर गया था। तब क्षेत्रीय लोगों से चंदा कर मंदिर के महंत मौनी बाबा जूना अखाड़े के साधुओं की मदद से मंदिर का जीर्णोद्धार कराने लगे। चार दिन पहले रेलवे के चंदौसी सेक्शन के आईओडब्ल्यू दिनेश कुमार, आंवला के सीडब्ल्यूआई ज्ञानप्रकाश टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मंदिर को रेलवे की जमीन पर बना होना बताकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। रेल अधिकारियों ने मंदिर का गुंबद भी तुड़वा दिया। शुक्रवार दोपहर फिर रेल अधिकारी आरपीएफ के साथ पहुंचे और मंदिर को रेलवे की संरक्षा, सुरक्षा के लिए घातक बताते हुए ढहाने को कहने लगे।
मौके पर मौजूद लोग अफसरों से बहस करने लगे। कहा, इतने पुराने मंदिर को गिराने की क्या उनके पास अनुमति है। पहले से इसका अल्टीमेटम क्यों नहीं दिया गया, लेकिन रेलवे के अधिकारी इन सवालों का जवाब नहीं दे सके। चंदौसी से आए इंजीनियरिंग विभाग के जेई मितुल कुमार मंदिर को हर हाल में गिराने पर अड़ गए तो स्थिति बिगड़ने लगी। विहिप जिलाध्यक्ष एडवोकेट संजय भदौरिया, क्यारा ब्लॉक अध्यक्ष विशाल चौहान के नेतृत्व में करीब तीन सौ लोग मौके पर जमा हो गए। उन्होंने नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू किया तो अफसरों के हाथ पैर फूल गए। फिर वह सात दिन में मंदिर खुद हटाने का नोटिस चस्पा करके चले गए।

कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी

सुभाषनगर निवासी राधा शर्मा विहिप नेताओं के आने से पहले भीड़ का नेतृत्व कर रही थीं। उन्होंने रेलवे अफसरों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि मंदिर तोड़ा गया तो जनता धैर्य छोड़कर कानून हाथ में ले सकती है। अफसर नोटिस चस्पा करके चले गए तो राधा शर्मा वकीलों से संपर्क कर कानूनी पैरवी तेज करने में जुट गई हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर रेलवे की जमीन पर नहीं है। वह बरसों पहले से बना है। आसपास इलाके में इसकी काफी मान्यता है। रेलवे अधिकारी भी इस बात को जानते हैं। कुछ दिन पहले मंदिर के महंत की एक रेलवे अधिकारी से कहासुनी हो गई थी। वह इसका बदला मंदिर गिराकर लेना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें