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रेल मंत्री की कुछ तो कृपा हुई बरेली मंडल पर

Fri, 26 Feb 2016 01:45 AM IST
बरेली
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बरेली। बरेली मंडल पर रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की कृपा तो हुई लेकिन न तो नई ट्रेनों का तोहफा मिला और न ही सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव हुआ। बरेली से दक्षिण के लिए सीधी ट्रेन भी नहीं मिल पाई। हालांकि करीब 25 साल से बरेली के लाल फाटक पर ओवरब्रिज बनाने के लिए 72 करोड़ रुपये रिलीज करने का प्रस्ताव किया गया है। यहां दो पुल बनने हैं। इनमे से एक के लिए 34 तो दूसरे के लिए 38 करोड़ का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। इसके अलावा आठ अन्य ओवरब्रिज तथा छोटी लाइन से बड़ी लाइन में बदलने के लिए 2.92 अ़रब रुपये जारी करने का प्रस्ताव हैं।
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उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से भेजे गए प्रस्तावों के आधार पर बजट में 9877 करोड़ रुपये के भोजीपुरा-पीलीभीत-टनकपुर रेलवे ट्रैक को ब्राडगेज करने के लिए 360 करोड़ रुपये की और व्यवस्था की गई है। शाहजहांपुर के रोजा रेलवे स्टेशन को अब कामर्शियल स्टापेज के तौर पर प्रयोग किया जाएगा। इससे यात्रियों को सहूलियत मिलेगी। रोजा स्टेशन अभी तक आपरेटिंग स्टेशन के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। यहां 25 ट्रेनें रुकती हैं लेकिन उनका टिकट नहीं मिलता है।
इसके अलावा खटीमा से किच्छा के बीच नई रेलवे लाइन के लिए सात करोड़ रुपये और 1900 करोड़ रुपये से बहराइच से मैलानी तक 230 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के आमान परिवर्तन का प्रस्ताव भी किया गया है। आनंद नगर-गोंडा-बहराइच-मैलानी के बीच 443 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के विद्युतीकरण के लिए भी 425.3 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
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‘रेल बजट में बरेली मंडल को काफी मिला है। नई ट्रेनों के बारे में किसी भी खास स्थान का उल्लेख नहीं किया है। जब भी नई ट्रेन चलेंगी उनमें इज्जत नगर मंडल के बरेली से कासगंज होते हुए दक्षिण के लिए होंगी। पिछले साल की घोषणा के आधार पर एक ट्रेन तो 22 अप्रैल से मुंबई-बांद्रा के बीच संचालित की जानी है।’
- चंद्रमोहन जिंदल, डीआरएम, इज्जतनगर मंडल

रेल बजट में बरेली को मिला
- बरेली से चनेहटी के बीच लाल फाटक पर दो ओवरब्रिज का निर्माण कराने के लिए 72 करोड़
- बरेली, चंदौसी से हरदुआगंज (अलीगढ़) रेल लाइन का विद्युतीकरण
- 208 करोड़ रुपये की खटीमा से किच्छा तक प्रस्तावित 57 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए 20 करोड़
- 950 करोड़ रुपयों से बहराइच से मैलानी तक की छोटी लाइन से बड़ी लाइन में बदलने को 10 करोड़
- 210 करोड़ रुपये से कानपुर, बरेली होते हुए कासगंज मथुरा तक सात ओवर ब्रिज के लिए 30 करोड़
- 37 करोड़ से इज्जतनगर में प्रस्तावित डेमू शेड निर्माण के लिए 3.5 करोड़
 - रामनगर से काठगोदाम ट्रैक के बड़ी  लाइन में परिवर्तित करने के प्रस्ताव को 100 करोड़
- ऐशबाग-मैलानी के बीच दो संपर्क मार्गों का निर्माण

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कुछ तो कृपा हुई प्रभु की बरेली पर

लाल फाटक पर ओवरब्रिज देगा जाम से मुक्ति
क्रासर
-ढाई दशक से चली आ रही है मांग
-आंदोलन और धरना प्रदर्शन तक हुए
- 72 करोड़ रुपये का बजट मिलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लंबे इंतजार के बाद रेल बजट में लाल फाटक पर ओवर ब्रिज बनाने के प्रस्ताव को शामिल कर हरी झंडी दे दी है। बरेली और चनेहटी के बीच  दो पुलों के निर्माण के इस प्रस्ताव को बजट में शामिल कर लिया गया है। यह बरेली की ढाई दशक पुरानी मांग थी। लंबे अर्से तक आंदोलन और धरना प्रदर्शन हुए।
बदायूं  रोड पर  एक फाटक खुलता है तो दूसरा बंद हो जाता है। इसके चलते, रोजाना ट्रैफि क जाम में बदायूं की ओर से आने वाले और आसपास के इलाके के करीब तीन लाख लोग फंस जाते हैं।  कई बार प्रस्ताव बने, सर्वे हुआ लेकिन कभी प्रदेश सरकार में अटकाया तो कभी रेलवे बोर्ड ने इसको संज्ञान में नहीं लिया। इस मंजूरी के बाद जून से इसका निर्माण शुरू होने के संकेत मिले हैं। जिसे ढाई साल में पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है।


 रेलवे और सेतु निगम के संयुक्त बजट से बनेगा पुल 
बरेली। सेतु निगम ने लाल फाटक पर 11 सौ मीटर लंबा टू लेन फ्लाईओवर बनाने के लिए पांच साल पहले भी राज्य सरकार को प्रोजेक्ट भेजा था। जो कि  रेलवे वर्क्स प्रोग्राम में लंबे समय से विचाराधीन था।  एक साल पहले सीएम की घोषणा के बाद सेतु निगम ने संशोधित प्रोजेक्ट भेजा। कमिश्नर ने बोर्ड में प्रयास किए। दूसरी ओर बरेली आगमन के दौरान रेल मंत्री सुरेश प्रभु और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के सामने इस मुद्दे को रखा गया। दोनों मंत्रियो ने इसके लिए आश्वासन दे दिया था।इसमें फ्लाईओवर की लागत 52 करोड़ से अधिक रखी गई। इस पुल का रेल लाइन का हिस्सा रेलवे का कंस्ट्रक्शन एंड सेफ्टी विभाग बनाएगा, जबकि दोनों और के हिस्से को राज्य सरकार की कार्यदाई संस्था सेतु निगम बनाएगी।

बरेली से अलीगढ़ तक  इलेक्ट्रिक इंजन
बरेली-चंदौसी-हरदुआंगज लाइन का होगा इलेक्ट्रिफिकेशन
बरेली/ मुरादाबाद। रेल बजट में इस साल सबसे बड़ी योजना बरेली चंदौसी हरदुआगंज और चंदौसी मुरादाबाद लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन को स्वीकृति मिली है। इस योजना का सर्वे 2011 के बजट में स्वीकृत किया गया था। इस बजट में स्वीकृति मिलने के बाद इस रूट का महत्व बढ़ जाएगा।  दिल्ली हावड़ा रूट पर ट्रैफिक कम करने के लिए इस लाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस लाइन पर ट्रैक पहले ही 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर ट्रेन चलाने के लिए तैयार किया जा चुका है। इस लाइन पर दोहरीकरण का सर्वे भी किया जा चुका है। ऐसे में इस लाइन को आगे चलकर बाईपास के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा। आंवला से भी विद्युतीकरण की मांग लगातार की जा रही थी। पांच लाइनों के विद्युतीकरण का प्रस्ताव रखा गया था मगर व्यावसायिक लिहाज से सिर्फ एक का ही विद्युतीकरण को मंजूरी मिली।


वाईफाई की रेंज में नहीं आया मंडल
बरेली।  रेल बजट में वाईफाई सुविधा से लैस किए जाने वाले सौ स्टेशनों की घोषणा की गई है। जिनमें बरेली मंडल का कोई स्टेशन शामिल नहीं है।  डीआरएम प्रमोद कुमार ने बताया कि वाईफाई सुविधा के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा।  उम्मीद है अगले साल की सूची में दो तीन स्टेशनों को लिया जाएगा।

कुली कहो या सहायक क्या फर्क पड़ता है
बरेली। ‘यात्री सहायक’ नाम देकर भले ही कुलियों के प्रति संवेदना दिखाई गई हो, लेकिन उनकी जेब अब भी खाली है। 40 साल से कुली पीर मोहम्मद बताते हैं कि वर्ष 2004 में 150 कुली बरेली में थे। लालू ने गैंगमैन बनाया तो अब सिर्फ 33 रह गए। 30 साल से कुली परसादी लाल कहते हैं कि कुली की प्रथा अब खत्म हो रही है। 15 ऐसे कुली हैं जिनकी मौत के बाद अभी तक उनके बच्चों को कुली नहीं बनाया गया।  जयपाल, निसार और हरदयाल बताते हैं कि जब से यात्रियों के पास खींचने वाली अटैचियां (स्ट्राली बैग) आए हैं तबसे उनकी सेवा कम हो गई है। अब हर बजट में रेलवे प्रशासन से आस रहती है कि वे कुछ करेंगे।

इधर भी नजर पड़ जाए
बरेली।  बरेली जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक को छोड़ दें तो अन्य प्लेटफार्म पर न तो सफाई मिलेगी और न ही कोई सुविधा। शौचालय के लिए लोग पटरी का ही इस्तेमाल करते हैं। वेटिंग रूम में जगह है लेकिन बैठने को कुर्सियां नहीं हैं। यात्री मेज के ऊपर बैठते हैं। बाथरूम गंदे हैं।  प्लेटफार्म नंबर एक पर महिला शौचालय अभी तैयार नहीं हुआ है। वे कहां जाए इसका इंतजाम नहीं किया गया है। इंक्वायरी विंडो पर  एक ही कर्मचारी को एनाउंसमेंट और यात्रियों की समस्या सुननी होती है। स्वचालित सीढ़ियां बनाने की बात कही जा रही है कुछ नहीं हुआ।
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