पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य सिग्नल और टेलीकॉम इंजीनियर कार्यालय के पीछे गोदाम परिसर में बुधवार दोपहर भीषण आग लग गई। कुछ ही देर में परिसर में पड़े केबल के बंडल धू-धू कर जल गए। फायर ब्रिगेड के अलावा सेना को भी बुलाया गया। करीब तीन घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। रेलवे प्रशासन एक करोड़ के नुकसान का आकलन कर रहा है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। डीआरएम ने जांच के लिए तीन अफसरों की कमेटी बना दी है।
इज्जतनगर इलाके में रोड नंबर एक पर पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल का उप मुख्य इंजीनियर, उप मुख्य सिग्नल और टेलीकॉम इंजीनियर ऑफिस के पीछे टेलीकॉम गोदाम है। गोदाम के परिसर में केबल के बंडल पड़े हुए थे। बुधवार दोपहर डेढ़ बजे परिसर में आग लग गई। तेज हवाओं के चलते आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते आग के शोले आसमान तक उठने लगे और केबल के बंडल जलने लगे। सूचना मिलने पर डीआरएम चंद्र मोहन जिंदल मौके पर पहुंच गए। आग बुझाने के लिए सेना और फायर ब्रिगेड बुलाई गई। करीब बारह गाड़ियों से पानी डाला गया। जितना पानी पड़ रहा था, केबल में धधक रही आग और तेज हो रही थी। आसमान में धुआं छा गया। तेज लपटों की तपिश आसपास भी महसूस की जा रही थी। इस दौरान दो जेसीबी से कुछ केबल के बंडल खींचकर बचा लिए गए। रेलवे के कुछ अफसरों का कहना है कि परिसर में खडे़ पेड़ों के पत्तों को जलाने के लिए लगाई गई आग से हादसा हुआ।
कोट
आग में करीब एक करोड़ रुपये की केबल जल गई। आग कैसे और किसने लगाई, इसकी जांच के लिए उप मुख्य इंजीनियर, उप मुख्य सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर के अलावा आरपीएफ कमांडेंट की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी की रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले पर कार्रवाई की जाएगी।
- चंद्र मोहन जिंदल, डीआरएम इज्जतनगर