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पीडब्ल्यूडी वाले खा गए एक मीटर पिचिंग का पैसा, और बढ़ गया बाढ़ का खतरा

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बरेली। नवाबगंज तहसील के गांव पंडरा में बाढ़ बचाव के लिए पीडब्ल्यूडी ने पिचिंग बनाने के काम में घोटाला कर दिया। कुछ गांव वालों की शिकायत पर जांच हुई तो पता चला कि कार्यस्थल पर जो बोल्टर कटर बने हुए हैं, उनकी ऊंचाई एक से डेढ़ मीटर तक कम है। अब पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर सफाई दे रहे हैं कि बजट ही कम था। बाढ़ खंड के एक्सईएन ने इस मामले की जांच एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय को भेज दी है।
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बाढ़ आने के कारण गांव पंडरा में नदी के कटान से कई लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और नदी में भी समा चुके हैं। इस बारे में प्रशासन को शिकायत मिलने के बाद बाढ़ के कटान को रोकने के लिए यहां पीडब्ल्यूडी से कई लाख रुपये का बजट खर्च करके बचाव कार्य कराए गए थे। एडीएम के आदेश के बाद बाढ़ खंड के उच्चाधिकारियों ने इस प्रकरण की जांच बाढ़ खंड द्वितीय के सहायक अभियंता से कराई थी। इसमें यह पाया गया था कि गांव पंडरा और दावीखेड़ा में पहले बनाए गए बोल्डर कटर और ईसी बैग के पिचिंग का काम लोक निर्माण विभाग ने मानकों के अनुरूप नहीं कराया है। इसके अलावा इसकी ऊंचाई को भी तय मानक से एक से डेढ़ मीटर तक कम रखा गया है। जांच अधिकारी को शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि पीडब्ल्यूडी ने पिछले साल भी गांव के लिए कार्ययोजना को तैयार किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बचाव में अपना तर्क दे रहे हैं कि इस काम के लिए धन की मांग डीएम से माध्यम से सीआरएफ मद से की गई थी, लेकिन पर्याप्त बजट ही नहीं मिला है। एडीएम को भेजी गई जांच रिपोर्ट में बाढ़ खंड के एक्सईएन ने कहा है कि चूंकि पहले यह काम पीडब्ल्यूडी ने ही किया है। इसलिए अवशेष काम भी उसे ही करना है।
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