बरेली। मंडल में भले ही धान क्रय केंद्र बंदी के कगार पर हैं, लेकिन खाद्यान्न लाखों कुंतल चावल पंजाब और हरियाणा तस्करी कर अपना धंधा पूरा कर लिया है। इस खेल में वाणिज्य कर, मंडी समिति और खाद्य विभाग शामिल हैं। क्योंकि इनकी मदद से ही चावल से भरे सैकड़ों ट्रक दूसरे राज्यों तक पहुंचे हैं।
हरियाणा और पंजाब मिलर्स ने सरकारी खरीद में तैयार किया चावल निर्यात करना शुरू कर दिया है। भारी मात्रा में मिलर्स ने सरकारी खरीद योजना का फाइन चावल भंडारित कर लिया। सरकारी गोदामों में चावल सप्लाई करने को यूपी स्थित खाद्यान्न माफियाओं से हाथ मिला। इन माफियाओं ने शाहजहांपुर, पीलीभीत और बरेली स्थित राइस मिलों से सवा लाख टन से ज्यादा चावल खरीद कर पंजाब और हरियाणा मिलर्स को सौंप दिया। बरेली मंडल से 12.50 लाख कुंतल चुपचाप तस्करी होने से यूपी में सरकारी खरीद प्रभावित हो गयी है। क्योंकि तस्करी में शामिल मिलों का चावल यूपी एफसीआई गोदामों में पहुंचना था, जो कि दूसरे राज्यों में पहुंच गया।
केंद्र हुए सूनसान
सरकारी केंद्रों पर बमुश्किल 25 प्रतिशत धान खरीद हो पायी है। क्योंकि शाहजहांपुर, पीलीभीत और बरेली स्थित सौ से ज्यादा राइस मिल मालिकों ने जमकर धान खरीदा और चावल बना कर हरियाणा, पंजाब मिलर्स के हाथों बेंच दिया। इसलिए सरकारी क्रय केंद्र सूनसान हो गए हैं।
मिलीभगत से तस्करी
खाद्य विभाग ने योजनाबद्घ तरीके से धान खरीद में कोई रुचि नहीं ली। इसका फायदा मिलर्स ने उठाया। टैक्स चोरी कर धान खरीदा और चावल बनाया। अन्य राज्यों को सप्लाई देने पर मंडी और वाणिज्य कर मिलाकर साढे़ छह प्रतिशत देना होता है। पंजाब और हरियाणा में टैक्स नहीं है। इस तरह करीब पौने दो करोड़ रुपये की यूपी टैक्स चोरी हो गयी।
‘अन्य राज्यों में चावल तस्करी होना गंभीर मामला है। इस मामले में जांच कर मिल संचालकों पर ठोस कार्रवाई होगी।’
- बीपी सिंह, एडिशनल कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग