नोट बंदी के बाद छोटे से बरेली के दो लाख जनधन योजना के खातों में दो अरब रुपये अचानक धन क ी बरसात हो गई है। आठ नवंबर तक जिले के जिन आठ लाख खातों में एक भी पैसा नहीं था, उनमें से दो लाख खातों में 48 हजार से एक लाख रुपये तक जमा हो गए। यह स्थिति एक जिले की है, प्रदेश और देश के जनधन खातों का आंकलन किया जाए तो काफी तादाद में काला धन इन खातों में जमा हो जाएगा।
जनधन के इन खातों में प्रचलन से बाहर हुए 500 और एक हजार रुपये के करीब दो अरब रुपये जमा हो गए है। यह जानकारी हुई तो बैंक और इनकम टैक्स के अधिकारी चौकन्ने हो गए। सवाल यह है कि आखिर इन खातेदारों के पास यकायक इतना पैसा आया कहां से आया। यह आशंका पहले भी की गई थी और अब इसमें बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी काट के लिए बैंक, खुफिया एजेंसी और इनकम टैक्स विभाग की टीम जुटी हुई है।
जिले में अक्तूबर तक आठ लाख 33 हजार जनधन खाते थे। इनमें से 32 हजार खातों में ही धनराशि जमा थी, बाकी के खाते जीरो बैलेंस पर बने हुए थे। बैंक की ओर से प्रचारित किया जा रहा था कि वह कम से कम 100 रुपये जमा करके अपने खातों को एक्टिव करा लें। उस समय तक खाते एक्टिव नहीं हुए। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और एक हजार के नोट प्रतिबंधित किए तो नौ से लेकर 18 नवंबर तक दो लाख खातों में धन की बरसात हो गई।
इनकम टैक्स विभाग का मानना है कि जिन लोगों के पास रहने के लिए पक्के मकान नहीं हैं। कच्चे मकान और झोंपड़ी में रह रहे हैं। उनके खातों में अचानक इतनी संख्या में जमा रकम निश्चित रूप से काला धन है। जिसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है और इस बारे में नए निर्देशों का इंतजार है। वहीं दूसरी ओर आईबी की टीम कुछ गांवों का ब्योरा मिल गया है, जिसके आधार पर गोपनीय तरीके से यह पड़ताल की जा रही है कि उनके पास यह रकम कहां से आई और काला धन किसका है।
नियम है कि 49 हजार रुपये तक जमा होने पर जनधन खातेदारों को सरकार की ओर से सुविधाएं मिलती रहेंगे। इसके अधिक यानी कि इन खातों में जमा की सीमा 50 हजार से पार हुई तो यह खाते सामान्य बचत खातों में स्वत: ही तब्दील हो जाएंगे। पहले जिन लोगों को जानकारी नहीं थी उन्होंने एक-एक लाख रुपये जमा करा लिए थे। जैसे ही पता चला कि जनधन खाते का स्वरूप बदल जाएगा, वैसे ही उन्होंने अपने खातों में 50 हजार से कम रुपये जमा कराना शुरू कर दिया। ऐसा होने पर वह जांच के दायरे में भी नहीं आ सकेंगे।