गोरखपुर। नातिन एक दिन पीटी उषा बनेगी, इसलिए बाबा बरेली से 700 किमी दूरी तय कर गोरखपुर उसका स्टेट लेवल का मैच देखने पहुंचे थे। बरेली से आए रामपाल (60) ने बताया कि यह पहली बार नहीं है। नातिन जहां भी टीम के साथ जाती है, वहां उसके हौसला अफजाई में वह जरूर पहुंचते हैं। रीजनल स्टेडियम में स्टेट लेवल महिला एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं चल रही हैं। यहां कई अभिभावक सारा काम छोड़कर लंबी दूरी तय करके बेटियों का हौसला बढ़ाने आए हैं। उनका सपना है कि एक दिन बेटी देश के लिए गोल्ड जीतकर अपनी अलग पहचान बनाए। स्टेट लेवल महिला एथलेटिक्स एवं बैडमिंटन प्रतियोगिता में 18 मंडल से महिला खिलाड़ी आई हैं।
भोर में उठकर नातिन को कराता हूं अभ्यास
बरेली फरीदपुर के चाहरपुर गांव से आए रामपाल मौर्या (60) दंगल फिल्म के आमिर खान से किसी मामले में कम नहीं हैं। रामपाल ने बताया कि मेरी नातिन क्रांति मौर्या (17) 10वीं में पढ़ती है। शुरू से ही उसका सपना था कि पीटी उषा की तरह वह भी तेज दौड़कर देश के लिए मेडल जीते। बचपन से ही उसे सुबह उठाकर अभ्यास कराने से लगाए हर मैच में जरूर पहुंचता हूं। वह भले ही टीम और कोच के साथ जाती है, उसकी कमियों को देखकर उसे बताता हूं। उन्होंने बताया कि क्रांति को दौड़ता देखकर गांव की और लड़कियां भी अब आगे आ रही हैं। क्रांति के साथ ही गांव की काजल और स्वाति भी मंडल की टीम से आई हैं। क्रांति ने कई पदक जीते हैं।
घास काटती है मां, अपने खर्चे पर मैच देखने जाती हैं
बरेली मंडल की टीम से खलपुर गांव की मानषी कश्यप (12) आई हैं। मैच देखने मां रानी भी अपने खर्चे पर साथ आई हैं। उनके पति रमेश मजदूरी करते हैं। पेट पालने के लिए रानी घास काटती हैं। लेकिन बेटी का हर मैच देखने वह जरूर जाती हैं। कक्षा सात में पढ़ने वाली मानषी ने कम ही उम्र में दौड़ लगाकर कई पदक जीते हैं। इसलिए मां भी मानषी को खेल में आगे बढ़ाने में मदद कर रही हैं। रानी कहती हैं कि बेटी नाम ऊंचा करे, यही मेरा सपना है। मानषी का सपना है कि एक दिन उड़नपरी की तरह दौड़कर इतिहास बनाए। अमर उजाला ब्यूरो