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सारे संताप दूर करती है श्रीमद्भागवत कथा

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बरेली। ईश्वर के तीन रूप-सत्य, चित, आनंद हैं। वे तीन कार्य- उत्पत्ति, पालन और संहार करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा ईश्वर के इन्हीं रूप और कर्मों को विस्तार से बताती है। जिसके श्रवण से मनुष्य को ज्ञान, भक्ति और मुक्ति की प्राप्ति होती है।
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मंगलवार को त्रिवटीनाथ मंदिर में इन्हीं आशीर्वचनों से वृंदावन से आए कथाव्यास डॉ. पं. सुरेश शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया। कथा व्यास ने बताया कि जैसे गंगा में स्नान करने से मनुष्य जन्म-कर्म के बंधन से मुक्ति पाता है ठीक वैसे ही ज्ञान के अथाह समुद्र श्रीमद्भागवत कथा में स्नान कर मनुष्य जन्मों के कष्ट और संताप से मुक्ति पा सकता है। उन्होंने शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई भागवत कथा के बारे में श्रद्धालुओं को बताया। कहा, पुराण के बारह स्कन्धों में भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन है। श्रीमद्भागवत में 12 स्कंध, 335 अध्याय और 18 हजार श्लोक हैं। आखिर में प्रसाद वितरण से कथा का विश्राम हुआ। ब्यूरो
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