क्या आप फर्जी हाउस रेंट स्लिप दिखाकर टैक्स बचाते हैं? अगर जवाब हां है तो आपके लिए बुरी खबर है। अब आप परिवार या रिश्तेदारों के जरिए फर्जी रेंट स्लिप दिखाकर एचआरए क्लेम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अब आयकर विभाग टैक्सपेयर से संबंधित प्रॉपर्टी की वैध किराएदारी का सबूत मांग सकता है।
आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल ने हाल ही में इसके बारे में एक नियम जारी किया है। इसके मुताबिक, असेसिंग ऑफिसर सैलरी पाने वाले कर्मचारी का क्लेम देखेगा और अगर जरूरी हुआ तो वो इसका पुख्ता सबूत भी मांग सकता है। इसमें बतौर सबूत किराएदार को किराए का एग्रीमेंट, किराए की पक्की रसीद, हाउसिंग सोसाइटी का पत्र, बिजली या पानी का बिल भी देना पड़ सकता है। अभी तक एक लाख से ऊपर किराया देने पर मकान मालिक का पैन नंबर ही रसीद में लिखना भर होता है। हाल ही में ट्रिब्यूनल मुंबई में ऐसे ही एक केस का पता चला, जिसमें एक कर्मचारी ने अपने आयकर विवरण में अपनी मां को किराया देना दिखाया हुआ था, जो कि सबूतों के अभाव में झूठ गलत मिला, तब विभाग ने क्लेम की गई रकम को उसकी आय में शामिल कर टैक्स जमा कराया।
एचआरए में छूट के नियम
दरअसल, कोई भी सैलरी क्लास कर्मचारी रेंट रसीद देकर रेंट हाउस अलाउंस का 60 फीसदी तक टैक्स बचा सकता है। सीए के मुताबिक आईटी एक्ट के सेक्शन 10 (13ए) के तहत नौकरीपेशा लोग मकान किराए पर या बेसिक सैलरी के 50 फीसदी (मेट्रो सिटी) या 40 फीसदी (नॉन मेट्रो) या फिर दिए गए किराए में बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कम, इनमें जो भी सबसे कम हो, तक की छूट पा सकते हैं। अभी टैक्स बचाने के लिए केवल किराए की रसीद ही जमा करनी होती है। एक लाख सालाना से ज्यादा अगर किराया है तो मकान मालिक का पैन नंबर भी देना होता है।
ऐसे उठाते हैं फायदा
अब तक वेतनभोगी कर्मचारी, जिन्हें एचआरए मिलता है, वे किराए की रसीद देकर इससे 60 फीसदी हिस्से पर टैक्स नहीं भरते हैं। इस नियम से कई कर्मचारियों को दिक्कत हो सकती है। इस नियम के मुताबिक, अगर आप अपने माता-पिता के घर में रहने के लिए किराया देते हैं, तब भी आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसमें जरूरी है कि मकान आपके घरवालों के नाम पर हो और घरवाले आपके दिए किराए की रकम को अपनी आय में दिखाते हों। इसके अलावा अगर आपका अपना मकान है, पर आप उसमें रहने के बजाय किराए पर रहते हैं तो भी एचआरए क्लेम कर सकते हैं।
एचआरए क्लेम के लिए किराए के सभी मूल दस्तावेज देने का नियम काफी पुराना है, लेकिन कभी इसका सख्ती से पालन नहीं हुआ। मुंबई का मामला सामने आने के बाद आयकर विभाग ने इसे इस साल से सख्ती से लागू कर दिया है।
- रमेश चंद्र अग्रवाल, सीए