बरेली। आधुनिक तकनीक के समावेश से जिले के उद्योग बेहतर हो रहे हैं। उद्यमी अपने कारखानों को स्वचालित मोड की और ले जा रहे है। इसके लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे गलतियों की आशंका काफी कम हो जाती है और उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। खाद्य पदार्थ बनाने वाली जिले की छह बड़ी कंपनियों में इस तकनीक का प्रयोग हो रहा हैं।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन मयूर धीरवानी ने बताया कि इस तकनीक के जरिये मशीनों में ऐसी प्रोग्रामिंग की जा रही है कि कोई फाल्ट आने पर मशीनें आपस में समन्वय कर दूसरी मशीनों को इसका संकेत देती हैं। इस पर दूसरी मशीन अपना प्रोडक्शन कम कर देती है। साथ ही, ऑपरेटर को मशीन की खराबी की सूचना मॉनिटर पर दिखने लगेगी। बड़ा फाल्ट होने पर यह मशीन चेतावनी देकर अपने आप रुक जाएगी।
कम निकल रहा स्क्रैप, मजदूरों का इस्तेमाल भी घटा
आईओटी तकनीक के इस्तेमाल से फैक्टरियों निकलने वाले स्क्रैप में करीब 10 फीसदी की कमी आई है। इससे नुकसान कम हुआ है और कंपनियों का मुनाफा बढ़ा है। लेबर कास्ट में भी कमी आई है। जहां दस श्रमिकों को लगाकर काम किया जा रहा था, वहां अब तीन से ही काम चल जा रहा है।
क्या होता है आईओटी
आईओटी परस्पर संबंधित उपकरणों का एक नेटवर्क है जो अन्य उपकरणों और क्लाउड से जुड़कर डाटा का आदान-प्रदान करते हैं। इन उपकरणों में रोजमर्रा के घरेलू सामान से लेकर जटिल औद्योगिक उपकरण तक सब कुछ शामिल हैं। उद्योगों में अधिक कुशलता से काम करने, बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने, निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करने और व्यवसाय के मूल्य को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है।