बरेली। वाराणसी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बरेली के चार और पीलीभीत के एक कारोबारी को जीआई टैग हासिल करने पर प्रमाणपत्र से नवाजा। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार का भरपूर सहयोग मिलने का आश्वासन भी दिया।
उपायुक्त उद्योग विकास यादव के मुताबिक बरेली से मॉडर्न ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के नत्थू हुसैन ने बांस-बेत फर्नीचर के लिए, शिल्प गाथा फाउंडेशन की छिदू देवी ने थारू एंब्रॉयडरी, एनआरआई वेलफेयर सोसायटी के फारूक ने जरी जरदोजी, उत्तर प्रदेश एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल ने टेराकोटा उत्पाद के लिए आवेदन किया था। जिन्हें बीते दिनों जीआई टैग मिल चुके हैं।
पीलीभीत से पीलीभीत बांसुरी कला संवर्धन एवं शिल्पी कल्याण समिति के रईस अहमद को बांसुरी उत्पाद के लिए जीआई टैग मिला था। सभी कारोबारियों को वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबंधित प्रमाणपत्र प्रदान किया।
फर्जीवाड़ा पर लगेगा अंकुश, बनेगी अपनी पहचान
उपायुक्त विकास के मुताबिक, जीआई टैग मिलने से उत्पादों की पहचान देश-दुनिया में होगी। इन उत्पादों को किसी दूसरे शहर या देश में बरेली के नाम के साथ जोड़कर बिक्री नहीं कर सकेंगे। लिहाजा, फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगेगा। ग्राहकों को अदा की गई कीमत में जीआई टैग में दर्ज गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेगा। कारोबार में भी वृद्धि के साथ कारीगरों की आमदनी भी बढ़ने की उम्मीद है।
क्या है जीआई टैग
जियोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई) टैग एक संकेतक है, जिसका उपयोग एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के विशेष विशेषता वाले उत्पाद को पहचान देना है। एक बार जीआई टैग मिलने पर अन्य कोई निर्माता उत्पादों के विपणन के लिए इनके नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकता। अनाधिकृत प्रयोग रोकर, उत्पाद की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात समेत कानून का पूरा संरक्षण मिलता है। ब्यूरो