मीरगंज। इलाके की नाहल नदी को फिर से जीवित करने की प्रशासन ने तैयारी तो शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस काम जमीन पर नहीं उतर सका है। नदी की जमीन पर अतिक्रमण बरकरार है। मानसून ने दस्तक तो दे दी है, लेकिन नदी अब भी सूखी है। ग्रामीणों का मानना है कि इस बीच यहां काम करवाकर तेजी लाया जा सकता है।
शासन के निर्देश पर डीएम अविनाश सिंह ने मीरगंज क्षेत्र में नाहल नदी के पुनर्जीवन के लिए टास्क फोर्स बना दी है। मुख्य विकास अधिकारी देवयानी के साथ डीएम ने नदी का निरीक्षण भी किया। इस दौरान नदी के किनारे पौधे लगाने, सुंदरता बढ़ाने और चौड़ीकरण के निर्देश दिए गए थे। करीब साठ किलोमीटर के क्षेत्र में बहने वाली इस नदी के किनारे बसे गांवों लभारी, कुल्छा, नौसना, खमरिया सानी, सिधौली आदि में नदी की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने की बात कही गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है, जबकि रामपुर क्षेत्र में नदी की सफाई का काम पूरा किया जा चुका है।
लोगों का सवाल है कि जब नदी में बाढ़ का पानी आ जाएगा, तब अतिक्रमण हटाना क्या सही होगा? फिलहाल नदी में पानी बिल्कुल नहीं है और सूखी पड़ी नदी में जमी घास और मिट्टी साफ करने तक की पहल नहीं की गई है। प्रशासन की योजना नाहल नदी को मीरगंज में एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी है। यह नदी रामपुर जिले के मिलक कस्बे से निकलकर बरेली जिले के मीरगंज क्षेत्र में बहती है।
सफाई व चौड़ीकरण की मांगग्रामीण पप्पू शर्मा ने बताया कि नाहल नदी को लेकर सिर्फ बातें हो रही हैं, काम कुछ नहीं। कब्जे अब तक नहीं हटे। समाजसेवी ओम प्रकाश शर्मा, ग्रामीण नवदीप शर्मा ने कहा कि अब तक सफाई या कब्जा हटाने का काम नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। संवाद
कितना धन खर्च होगा व जनसहयोग से कार्य हो सकेगा। इसके लिए एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो काम शुरू कर दिया जाएगा। 26 जून को लीलौर झील पर कार्य शुरू हो रहा है। इसके बाद नाहल नदी में कार्य कराया जाएगा।
-तृप्ति गुप्ता, एसडीएम, मीरगंज