बरेली। महिला चिकित्सालय में इलाज के लिए पहुंचीं महिलाओं को अव्यवस्था से जूझना पड़ा। पर्चा, परामर्श के बाद अल्ट्रासाउंड जांच और दवा के लिए कतार में लंबा इंतजार करना पड़ा। दवा के तीन काउंटर बंद थे। इसके चलते एकमात्र काउंटर पर लंबी कतार रही। महिलाओं के साथ ही पुरुष भी यहां खड़े दिखे।
शनिवार को आधे दिन और रविवार को सार्वजनिक अवकाश के बाद सोमवार को ओपीडी खुलने से पहले ही गर्भवती और महिला मरीज पर्चा काउंटर पर पहुंच गईं थीं। पर्चा लेकर परामर्श के बाद अल्ट्रासाउंड जांच और दवा के लिए चली गईं। एक मशीन पर अल्ट्रासाउंड जांच होने से गंभीर महिलाओं की जांच प्राथमिकता पर की गई। वहीं, सामान्य जांच के लिए पहुंची महिलाओं को आगे जांच के लिए बुलाया तो उन्होंने आपत्ति जताई। मिलीभगत के आरोप पर नोकझाेंक की स्थिति रही। सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर शांत कराया। फिर क्रमवार पर्चा लेकर जांच शुरू हुई।
दूसरी ओर, दवा वितरण के चार काउंटर में तीन बंद थे। एक काउंटर पर दवा लेने के लिए महिला मरीजों की कतार दवा वितरण परिसर से बाहर ओपीडी तक पहुंच गई थी। कुछ तीमारदारों ने आगे बढ़कर दवा लेने का प्रयास किया तो विरोध हुआ। सुरक्षाकर्मी की निगरानी में दवा बंट सकी। ब्यूरो
मंडलीय समीक्षा बैठक में मौजूद होने से अस्पताल में व्यवस्था संबंधी राउंड नहीं ले सका। एक ही दवा काउंटर खुला था। इसकी जानकारी नहीं है। स्पष्टीकरण लिया जाएगा। हंगामा या विवाद की सूचना नहीं है। - डॉ. त्रिभुवन प्रसाद, सीएमएस, महिला अस्पताल
डेंगू, मलेरिया थका, लिवर, किडनी, शुगर की जांच बढ़ी
बरेली। जिला अस्पताल में सोमवार को 1,842 मरीजों का इलाज हुआ। 1,342 नए पर्चे बने जबकि करीब पांच सौ मरीज पुराना पर्चा लेकर डॉक्टर से परामर्श और दवा लेने आए थे। फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेयी के मुताबिक दिन भर घना कोहरा होने से इलाज के लिए मरीज कम पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मरीज सर्द-गर्म, बुखार, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द, जकड़न, पेट संबंधी समस्याओं के रहे। पैथोलॉजी प्रभारी डॉ. यूवी सिंह ने बताया कि अब डेंगू, मलेरिया की जांच कम हो रही है। लिवर, किडनी, शुगर, बीपी आदि जांच बढ़ी हैं। ब्यूरो
ओपीडी के बाद शिविर में पहुंचे डॉक्टर, दिव्यांग परेशान
बरेली। सीएमओ कार्यालय परिसर में लग रहे शिविर में दिव्यांगों की परेशानी थम नहीं रही। कड़ाके की ठंड में दूरदराज से आए दिव्यांगों को घिसटकर शिविर तक पहुंचना पड़ा। दोपहर एक बजे तक इंतजार किया। फिर डॉक्टर पहुंचे तो दिव्यांगता सत्यापन का सिलसिला शुरू हुआ। स्टाफ के मुताबिक कई लोग सिर्फ आवेदन कैसे करें, ये जानकारी लेने पहुंचे थे। सत्यापन और नवीनीकरण के लिए करीब 60 दिव्यांगाें की जांच के बाद प्रमाणपत्र जारी किए जाने की संस्तुति हुई। दिव्यांगों के लिए कुर्सियों की व्यवस्था कराई गई है। ब्यूरो