बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की अवस्थापना निधि की मीटिंग 10 अक्टूबर, 2014 को तत्कालीन मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई थी। इसमें प्रस्ताव नंबर छह में डेलापीर तालाब का सौंदर्यीकरण, प्रस्ताव नंबर नौ में घंटाघर के मोती पार्क स्थित पार्किंग स्थल का सौंदर्यीकरण और अतिरिक्त प्रस्ताव में चौकी चौराहे से सर्किट हाउस तक सड़क के दोनों ओर फुटपाथ निर्माण की बात थी। सात महीने बीतने के बाद भी अब तक तीनों कामों की टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
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फुटपाथ का प्रस्ताव निरस्त हो गया
नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने चौकी चौराहा से सर्किट हाउस जाने वाली सड़क के दोनों ओर अवस्थापना निधि में 40 लाख रुपये से फुटपाथ बनाए जाने का अतिरिक्त प्रस्ताव रखा था, जो स्वीकृत भी हो गया। सात महीने बाद फुटपाथ न बनने के बारे में बीडीए का कहना है कि प्रस्ताव गलत स्वीकृत हो गया था। यहां फुटपाथ पहले से बना है।
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डेलापीर तालाब में भैंसों का राज
डेलापीर तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। सात माह बीतने के बाद तालाब में भैंसों का राज हैं। रोजाना एक से डेढ़ हजार भैंसें तालाब में नहलाई जाती हैं। इस तालाब का सौंदर्यीकरण हो जाता तो गर्मी में न सिर्फ पशु-पक्षियों की प्यास बुझती बल्कि इलाके का स्वरूप भी बदल जाता। पूरे इलाके में गंदगी भी फैली है।
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पार्किंग का सौंदर्यीकरण प्राथमिकता में नहीं
घंटाघर के निकट मोती पार्क स्थित पार्किंग स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए अवस्थापना निधि से 30 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। सात महीने बाद भी टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो पाई है। बीडीए का कहना है कि यह काम उसकी प्राथमिकता में नहीं है। पार्किंग स्थल का सौंदर्यीकरण होने से कुतुबखाना में जाम की समस्या कम हो सकती थी।
‘डेलापीर तालाब में पानी का निकास नहीं है। यह काम नगर निगम को कराना है। पार्किंग स्थल पर पुराना बिजलीघर हटाकर डेवलप करना है। इसके टेंडर निकाले गए हैं। फुटपाथ का प्रस्ताव गलत स्वीकृत हो गया था। उस सड़क पर फुटपाथ पहले से बना है।’ - अजय सिंह, चीफ इंजीनियर, बीडीए।
‘अवस्थापना निधि के काम स्वीकृत हुए सात महीने हो चुके हैं। कोई भी काम शुरू नहीं किया गया है। यह बीडीए की घोर लापरवाही का एक नमूना है। बीडीए के बाकी काम लटकने से शहर का विकास प्रभावित हो रहा है।’ - डॉ. आईएस तोमर, मेयर।