आरएसएस और भाजपा नेताओं के भड़ाकाऊ बयानों पर उत्तर प्रदेश के अवर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी का कहना है कि वह सत्ता देख रहें हैं, मुसलमान सिर्फ संविधान देखे। उन्हें किसी भी मुखालिफ बयान या आरोप पर विचलित होने की जरूरत नहीं है।
यहां रोटरी भवन में मुस्लिम मूवमेंट के कार्यक्रम में भाग लेने आए जिलानी ने पत्रकारों से बातचीत में मुस्लिम सियासी नुमाइंदगी के सवाल पर कहा कि हमारे सामने कुरान की रोशनी, नबी की सुन्नत और साहबा का किरदार है। इस्लाम के बुनियादी उसूल और शिक्षा या संविधान में जो मजहबी आजादी है उसी के अनुसार खुद तय करना है। आईएमआई के उवैसी बंधुओं की राजनीति पर बोले कि जब मुस्लिम बहुत परेशान था तब उनके दादा अब्दुल वहीद उवैसी ने 1958 में इंडियन इत्तेहादुल मुस्लिमीन (आईएमआई) का गठन किया था। उससे छह सांसद भी चुन कर संसद में पहुंचे। उन्होंने मुसलमानों की तकलीफ को संसद में उठाया । इसके बाद उनके पुत्र सलाह उद्दीन ने इस संगठन को चलाया और सामाजिक काम किया। उन दोनों लोगों की खास बात यह थी उनका जुबान पर काबू था इसीलिए उनकी बात सुनी गई।
मौजूदा वक्त में उत्तर प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद न चुने जाने पर जफरयाब ने कहा कि इसके लिए मुसलमान ही जिम्मेदार हैं। मुसलिम वोट पूरी तरह बिखर गया था। शिवसेना सांसद संजय राउत के मुस्लिमों से वोट का अधिकार छीनने के संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि उनकी नजर में इस बयान की कोई अहमियत नहीं है। जो बयान संविधान के खिलाफ हो उस पर ध्यान देने की जरूरत भी नहीं है। यही बात अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहें तो सोचने की जरूरत होती। राम जन्म भूमि के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं इसमें कोई धार्मिक टकराव नहीं है। हिंदू धर्म की आस्था पर कोई एतराज नहीं है कि राम आयोध्या में जन्मे, न विरोध है। बात उस जगह की है कि जिस जगह को जन्म स्थल कहा जा रहा है ।