छह महीने से बंद थी बोलचाल, दरोगा को घूसखोरी में पकड़वा चुका है तसव्वर
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कई मामले दर्ज हैं, मौलाना की हत्या में नामजद, पुलिस पर हमले के बाद जिला बदर भी हुआ
बरेली। करमपुर की प्रधान सुगरा बेगम के पति तसव्वर का पुलिस से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। खासकर मौजूदा चौकी प्रभारी दिनेश कुमार सिंह से उसकी लंबी अदावत चल रही थी और छह महीने से बोलचाल बंद थी। इस घटना में भी पुलिस तसव्वर को ही सूत्रधार मानकर जांच कर रही है। उस पर पहले से कई मामले दर्ज हैं।
पत्नी के प्रधान होने के नाते जनप्रतिनिधि के तौर पर करमपुर में तसव्वर की ही पहचान होती है। थाने की व्हाट्सएप ग्रुप में उसका नंबर शामिल था और वह सभी मीटिंगों में प्रधान की हैसियत से शामिल होता था। उसने 15 नवंबर को थाने के व्हाट्सएप ग्रुप में चौकी प्रभारी से अपनी व परिवार की जान का खतरा बताया था। इस पर इंस्पेक्टर केके वर्मा ने लिखा था कि ग्रुप में ऐसा लिखना सही नहीं है, उन्हें थाने आकर बात करनी चाहिए। इस मामले में तसव्वर का कहना था कि उन्होंने दरोगा जी से एक पीड़ित की मदद करने को कहा था। उन्होंने जनता के सामने उसकी बेइज्जती कर दी। चुनाव आने वाले हैं, दरोगा उसे और उसके परिवार को झूठा फंसा सकते हैं। वहीं, चौकी प्रभारी का कहना था कि जिन लोगों में झगड़ा हुआ वह दोनों ही गरीब थे। दोनों ने समझौता कर लिया। तसव्वर की इच्छा थी कि दूसरे पक्ष को रिपोर्ट लिखकर जेल भेज दें, वह ऐसा नहीं कर सकते।
सूत्र बता रहे हैं कि तसव्वर ने सिपाहियों से झगड़े के बाद भीड़ को चौकी पर जाकर हंगामा करने के लिए उकसाया। कुछ ग्रामीण घायल बताए जा रहे कश्मीर खां को चारपाई पर डालकर चौकी ले गए। तसव्वर इनके साथ था। जब उसने माहौल बिगड़ता देखा तो खुद घायल को लेकर जिला अस्पताल चला गया। पुलिस उसे पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड मान रही है। जाहिर है कि सब कवायद चौकी प्रभारी को नीचा दिखाने के लिए की गई। तसव्वर के खिलाफ इज्जत नगर व भोजीपुरा थाने में करीब दस मामले दर्ज हैं। इनमें से एक तो करमपुर की मस्जिद के इमाम की हत्या का मामला है जिसकी विवेचना भोजीपुरा में चल रही है। तसव्वर वह जिला बदर भी रह चुका है। भोजीपुरा में पुलिस मुठभेड़ का भी केस उस पर दर्ज है। वहीं दस जून 2009 को एडीएम सिटी ने उसे छह महीने के लिए जिला बदर भी किया था। पुलिस उसे दलाल बताती है जो सेटिंग न होने पर शिकायतें शुरू कर देता था।