बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच चल रही वर्चस्व की जंग में कार्रवाई की शक्तियां भी मुद्दा बन गईं हैं। अधिकारों की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि अगर कुलसचिव पीसीएस हैं तो उन पर कुलपति सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। साथ ही कुलसचिव के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप भी नहीं कर सकते हैं। समस्या होने पर कुलपति शासन स्तर पर पत्र लिखकर कार्रवाई करने की संस्तुति कर सकते हैं।
एक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने बताया कि कुलपति और कुलसचिव के अधिकार अलग-अलग हैं। कुलसचिव पर किसी भी कार्रवाई का अधिकार शासन को ही है।
दरअसल, शिक्षकों द्वारा कुलसचिव अजय कृष्ण यादव के घेराव के बाद 12 अप्रैल को कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कुलसचिव को प्रशासनिक कार्यों से विरत कर दिया था। इस पर 16 अप्रैल को शासन ने पत्र जारी कर कुलपति के आदेशों को नियम विरुद्ध बताया। 18 अप्रैल को कुलसचिव दोबारा पदस्थापित हुए और आदेश जारी किए। इन्हें कुलपति ने अमान्य करार दिया। साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए राजभवन से दिशा-निर्देश मिलने की बात कही। वहीं कुछ दिनों पहले उप कुलसचिव ने कुलसचिव के रूप में पत्र जारी कर कर्मचारियों का दूसरे विभाग में तबादला कर दिया था। इसे कुलसचिव ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। मामला संज्ञान में आने पर कुलपति ने पत्र जारी करते हुए कुलसचिव के 12 अप्रैल के बाद के निर्णयों को अमान्य करार कर दिया था। अब कुलसचिव ने फिर पत्र जारी किया है। उन्होंने शासन के निर्देश का पालन करने की बात कही है।
कुलसचिव को प्रशासनिक कार्यों से हटाया गया था। इस प्रकरण की रिपोर्ट राजभवन में भेजी गई है। वहां से दिशा-निर्देश मिलने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. केपी सिंह, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
मेरी जवाबदेही शासन स्तर पर है। इसमें कुलपति कोई कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। शासन के पत्र के बाद मैं दोबारा पदास्थापित हुआ था। - अजय कृष्ण यादव, कुलसचिव, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
शासन से नियुक्त कुलसचिव से समस्या होने पर कुलपति शासन में रिपोर्ट भेजा सकता है। साथ ही उसकी संस्तुति कर सकता है। कुलपति को सीधे तौर पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।- प्रो. दुर्ग सिंह चौहान, पूर्व कुलपति, एकेटीयू