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स्मार्ट क्लास के संचालन में बिजली संकट बन रहा बाधा

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बरेली। प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास चलाने का आदेश जारी कर दिया गया है। कई विद्यालयों में व्यवस्था भी कर ली गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों के सामने बड़ा संकट बिजली का है। कई बार ट्रिपिंग होने के चलते तय शेड्यूल में भी बिजली नहीं आती है। ऐसे में स्मार्ट क्लास नहीं चल पा रही हैं।
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कोविड के बाद से ही सरकार ने विद्यालयों में ऑनलाइन और स्मार्ट क्लास पर सबसे अधिक जोर दिया। प्राथमिक विद्यालयों में भेजी जा रही ग्रांट से स्मार्ट क्लास शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकाें का कहना है कि वे स्मार्ट क्लास शुरू भी कर देंगे लेकिन बिजली व्यवस्था ऐसी नहीं है कि क्लास चल सकें। ऐसे में यहां ग्रांट का उपयोग करना उसकी बर्बादी होगी। एक शिक्षक ने बताया कि जिले में कई विद्यालय ऐसे हैं जहां स्मार्ट क्लास बनकर तैयार हैं लेकिन बिजली संकट के चलते उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। बच्चों को ब्लैक बोर्ड पर ही पढ़ाया जा रहा है। बीएसए विनय कुमार का कहना है कि ग्रांट से काम कराने को कहा गया है। जो भी समस्याएं आ रही हैं, शिक्षकों से बात कर उनका समाधान किया जाएगा।
100 बच्चों पर 25 हजार की ग्रांट
शासन से 100 बच्चों पर 25 हजार रुपये की ग्रांट भेजी है। शिक्षकाें से कहा गया है कि वे इस धनराशि से विद्यालयों में स्मार्ट क्लास शुरू करें और दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय का निर्माण भी कराएं।
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शिक्षकों से बात
विभाग का कहना है कि यदि सौ बच्चे हैं तो 25 हजार रुपये में दिव्यांग शौचालय बनवाना है और स्मार्ट क्लास भी चलानी है, जबकि इतनी रकम में यह दोनों काम करा पाना संभव नहीं है। दूसरा बिजली की ट्रिपिंग से स्मार्ट क्लास नहीं चल सकती हैं। - भानु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, यूटा
ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की ट्रिपिंग बहुत होती है। ऐसे में स्मार्ट क्लास में पढ़ाई कराना संभव नहीं है। स्मार्ट क्लास के लिए इन्वर्टर का होना बहुत जरूरी है। इतने बजट में यह दोनों काम नहीं हो सकते। - सत्येंद्र सिंह, जिला उपाध्यक्ष, यूटा
बिजली की बड़ी समस्या है। हम किसी तरह विद्यालय में स्मार्ट क्लास तैयार भी कर लें तो उसे चला नहीं पाएंगे क्योंकि बिजली की ट्रिपिंग होती है। इसके लिए विद्यालय को इन्वर्टर मिलना चाहिए। - पवन दिवाकर, प्रधानाध्यापक, बारी खेड़ा, रामनगर
स्मार्ट क्लास तैयार करने में कोई समस्या नहीं है। स्मार्ट क्लास तैयार कर लेंगे लेकिन उसे चलाने के लिए बिजली के साथ ही इन्वर्टर की भी जरूरत है। इसके लिए हमारे पास बजट नहीं है। - प्रीति राना, बहजुइया, प्राथमिक विद्यालय
विभाग का कहना है कि इतनी ही ग्रांट में दिव्यांग शौचालय और स्मार्ट क्लास दोनों तैयार करना है, जबकि हर विद्यालय की स्थितियां अलग-अलग हैं। इतनी ग्रांट में दोनों काम होना संभव नहीं हैं। - शुमाएला खान, दीदार पट्टी, बिथरी चैनपुर
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