बरेली। वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2014 से अब तक जिले में 10 लाख से अधिक खाते खोले गए। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिये सीधे लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य था, पर कोरोना महामारी के बाद इनमें लेनदेन कम होने लगा। अब हालत यह है कि हर पांचवां खाता खाली है। बैंकों ने ऐसे दो लाख से अधिक खातों को निष्क्रिय कर दिया है।
योजना की शुरुआत से अब तक जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं में 10,57,876 जनधन खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से सर्वाधिक 2.21 लाख खाते बैंक ऑफ बड़ौदा में तो सबसे कम खाते ग्रामीण बैंकों में खोले गए हैं। शुरुआती दौर में लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंकों ने गांव-गांव शिविर लगाकर जनधन खाते खोले थे। काेराेना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगा और इसका सीधा असर लोगों की आय पर पड़ा। इसकी वजह से जनधन खातों में लेनदेन ठप हो गया और बैंकों ने उनको निष्क्रिय घोषित कर दिया।
किस बैंक में कितने खातेबैंक खातों की संख्या
भारतीय स्टेट बैंक 1,24,357
इंडियन बैंक 35,281
पंजाब नेशनल बैंक 280074
बैंक ऑफ बड़ौदा 221053
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 1,75,374
बैंक ऑफ इंडिया 1,57,143
दो साल तक लेनदेन नहीं होने पर निष्क्रिय हो जाते हैं खाते
आरबीआई के निर्देशानुसार अगर बचत खाते में दो साल से ज्यादा समय तक ग्राहक कोई लेनदेन नहीं करता है तो उसे निष्क्रिय माना जाता है। हालांकि, जनधन खातों में न्यूनतम राशि रखने की जरूरत नहीं होती है।
घरेलू दिक्कतों के कारण नहीं कर पाए लेनदेन
जीरो बैलेंस पर खाता खुलवाया था। कुछ समय तक तो लेनदेन होता रहा। इसके बाद घरेलू समस्याएं होने की वजह से खाते में रुपये नहीं जमा कर सकी। - शकुंतला देवी, फतेहगंज पूर्वी
कुछ दिन चला फिर बंद हो गया खाता
योजना के शुरुआती दौर में ही खाता खुलवाया था। पहले लेनदेन करता रहा, पर बाद में नहीं कर पाया। इस पर बैंक की ओर से खाते को बंद कर दिया गया है। - नन्हेलाल, गांव सिमरा बहोर
प्रत्येक बैंक की ओर से जनधन खाते खोले जा रहे हैं। इन खातों में लेनदेन न होने की वजह से इन्हें निष्क्रिय कर दिया जाता है। - वीके अरोड़ा, अग्रणी जिला प्रबंधक