फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएआरआई मेें मुर्गी दाने की किल्लत, संस्थान ने खुद बनवाना शुरू किया

विज्ञापन
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : social media
विज्ञापन

चिकन, अंडा, बिक्री काउंटर बंद, मांग भी घटी

बरेली। देश भर में अपनी पहचान रखने वाला केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान इन दिनों कोरोना की मार झेल रहा है। हर दिन 40 हजार मुर्गी और पक्षियाें के लिए खाना उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। कारण, स्टाक खत्म हो चला है। इसकी खरीद के लिए निर्धारित निविदा प्रक्रिया लॉकडाउन में पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे निपटने के लिए संस्थान के निदेशक ने किसी तरह अपने स्तर पर दाना बनवाना शुरू कराया है।
विज्ञापन

21 मार्च रात आठ बजे लॉकडाउन की घोषणा हुई थी। दूसरे दिन रविवार का अवकाश था। इसलिए संस्थान में सभी जरूरी कामकाज लंबित हो गए। इसमें सबसे ज्यादा प्रमुख काम पक्षी और मुर्गियों के लिए दाने की उपलब्धता थी। संस्थान में मौजूद करीब 40 हजार मुर्गी व पक्षियाें के लिए 80 क्विंटल दाने की हर दिन जरूरत होती है। इसकी सप्लाई ई-टेंडरिंग से होती है, लेकिन लॉकडाउन होने से टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने इस समस्या को हल करने के लिए संस्थान में ही दाना बनवाना शुरू किया है। मक्का, सोया समेत 14 आइटम से बनने वाले इस दाने को संस्थान के कर्मी वैज्ञानिकों के निर्देशन में बना रहे हैं।

सेल काउंटर और बाहरी प्रवेश बंद

लॉकडाउन में संस्थान ने बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया है। साथ ही चिकन और अंडा आदि की काउंटर बिक्री भी रोक दी गई है। यहां बता दें कि संस्थान में इन दिनों करीब तीन हजार यानी सवा सौ से डेढ़ सौ किलो तक अंडा उत्पादन होता है। इसकी आंतरिक तौर पर बिक्री भी हो रही है। क्योंकि अंडा उत्पादन रोका नहीं जा सकता है और ना ही इसका स्टाक संभव है। शोध कार्य पूरा होने के बाद चिकन तैयार हो रहा है। इसकी मांग अभी कम है क्योंकि कोरोना में ज्यादातर लोगों ने चिकन खाना बंद कर दिया है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है।
विज्ञापन

अंडा 60, चिकन 120
मांग कम होने पर संस्थान ने लॉकडाउन में अंडे के दाम घटाकर 60 रुपये प्रति किलो कर दिए हैं। एक किलो में करीब 20 अंडे होते हैं। चिकन उत्पादन सीमित होने से 120 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। यह बिक्री सिर्फ स्टाफ और आंतरिक तौर पर ही हो रही है।

लॉकडाउन में मुर्गी के दाने की किल्लत हो गई तो हमने अपने स्तर से दाना बनवाना शुरू करा दिया है। हर दिन करीब 80 क्विंटल दाना की जरूरत संस्थान पूरी कर रहा है। सेल काउंटर फिलहाल बंद करा दिया गया है। केवल स्टाफ आदि को उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

विज्ञापन

- डॉ. संजीव कुमार, निदेशक

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें