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Bareilly News: जमीन पर पड़े रहने वाले बीमार या घायल पशुओं को खड़ा करेगा पोर्टेबल स्टैंड

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बरेली। फ्रैक्चर, लकवा, बोवाइडन डाउन सिंड्रोम, मांसपेशियों में कमजोरी आदि कारणों से जमीन पर ही पड़े रहने वाले पशुओं को खड़ा करने में पोर्टेबल डाउन बोवाइन स्टैंड मददगार साबित होगा। इसके बाद ऐसे पशुओं को दवाएं भी आसानी से लगाई जा सकेंगी। दरअसल, कई दिनों तक एक ही तरफ पड़े रहने से पशुओं के घाव होने लगते हैं। इससे उनकी जान भी जोखिम में पड़ जाती है। इस स्टैंड को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। यह बाजार में 30 से 35 हजार रुपये में उपलब्ध है।
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ऐसे ही एक पशु को देखकर आया विचार
आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार के मुताबिक दो वर्ष पूर्व रेफरल पॉलीक्लीनिक में एक पशुपालक लकवाग्रस्त पशु को लेकर आया था। इलाज तो किया पर वह खड़ा नहीं हो पा रहा था। बांस और लोहे की रॉड आदि का प्रयोग कर कुछ देर के लिए खड़ा करना पड़ता था, पर संतोषजनक स्थिति नहीं रही। इसको देखकर ही यह मॉडल बनाने का विचार आया। करीब सालभर तक विभिन्न डिजाइन पर काम करने के बाद यह स्टैंड तैयार हुआ। एक बार खरीदने के बाद इसका इस्तेमाल कई साल तक किया जा सकता है।
पशुओं की मृत्युदर में प्रभावी कमी आने की उम्मीद
डॉ. बृजेश के मुताबिक पोर्टेबल स्टैंड पशु आश्रय स्थल, बड़े डेयरी फार्म और पशु चिकित्सकों के लिए उपयोगी है। क्योंकि यहां अक्सर ऐसे पशु पहुंचते हैं, जो खड़े नहीं हो पाते। न मालिस हो पाती है और न ही इलाज प्रभावी होता है। बीमारियां जल्द ठीक न होने से हालत बिगड़ने से जान जोखिम में पड़ती है। कहा कि स्टैंड के प्रयोग से पशु को जल्द स्वस्थ होंगे, मृत्युदर भी घटेगी। अगर किसी को स्टैंड चाहिए तो वे आईवीआरआई में संपर्क कर सकते हैं।
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ऐसे काम करता है स्टैंड... हैंडल से घूमती चेन एक हजार किलो तक के पशु को कर देगी खड़ा
डॉ. बृजेश ने बताया कि मॉडल इस तरीके से बनाया गया है कि पशु को जरूरत के मुताबिक उठाया जा सके और तकलीफ भी न हो। करीब एक हजार किलो वजन के पशु को यह उठाने में यह सक्षम है। इसके बीचोंबीच पशु को रखकर हैंडल को घुमाने से बेयरिंग में फिसलती चेन के सहारे पशु खड़े हो जाते हैं। जरूरत के अनुसार ऊंचाई भी निर्धारित की जा सकती है। इसमें दवा और ग्लूकोज आदि लगाने की भी व्यवस्था है।
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अजीत प्रताप सिंह

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर मौजूद विधायक व वक्ता। 

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