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कंडम वाहन यानी प्रदूषण बेशुमार और खतरे में जान

Thu, 09 Apr 2015 01:57 AM IST
बरेली
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शहर में चल रहे कंडम वाहनों के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। वाहनाें का प्रदूषण जांचने को जो काम निजी एजेंसियाें को सौंपा गया हैं उन्होंने पिछले तीन माह से आरटीओ को रिपोर्ट ही नहीं दी है। वहीं, आरटीओ में अभी तक करीब एक हजार कंडम वाहनाें ने ही सेरेंडर किया है। इसमें ट्रक, वैन और ऑटो भी शामिल है।
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आरटीओ दफ्तर में वित्तीय वर्ष 2014- 15 में अभी तक मात्र 1089 कंडम वाहनाें ने ही अपने आप को सेरेंडर किया है। जबकि इनकी संख्या अधिक बताई जा रही है। पिछले साल स्कूल वैन को लेकर आरटीए की बैठक में प्रस्ताव रखा जाना था कि सात साल की उम्र पूरी कर चुके वाहनाें को कंडम घोषित कर दिया जाए। लेकिन विरोध के चलते इस प्रस्ताव को टाल दिया गया और उम्र 12 वर्ष ही रहने दी गई। एआरटीओ उमाशंकर बताते हैं कि उस समय करीब 50 फीसदी वाहनाें ने अपनी उम्र पूरी कर ली थी। ऐसे में जाहिर है कि शहर में चल रहे कंडम वाहन किस तरह जान जोखिम में डालकर चल रहे हैं।
- तीन माह से नहीं भेजी प्रदूषण की जांच रिपोर्ट
शहर में वाहनाें का प्रदूषण मांपने के लिए चार एजेंसियां आरटीओ को हर महीने रिपोर्ट भेजती हैं। जिसमें उनके  द्वारा बताया जाता है कि कितने वाहनों का प्रदूषण जांचा गया। लेकिन हैरत की बात है कि पिछले तीन माह से किसी भी एजेंसी ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। आरटीओ के आरआई वीके चौधरी का कहना है कि एजेंसियाें हर माह रिपोर्ट भेज देती हैं, लेकिन इधर ध्यान न देने से लापरवाही बरती गई है। उन्होंने गुरुवार को ही एजेंसियों से रिपोर्ट मंगवाने को कहा है।
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- 50- 50 रुपये में जारी हो रहे प्रदूषण सर्टिफिकेट
डीजल और पेट्रोल वाहनाें का प्रदूषण स्तर जांचने के लिए जगह- जगह फ्रेंचाइजी लेकर जांच की दुकानें खुली हुई हैं। ये 50 रुपये में ही प्रदूषण का सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ और बरेली कालेज के बॉटनी विभाग के डॉ. डीके सक्सेना का कहना है कि पेट्रोल और डीजल के धुएं के साथ नाइड्रोजन, सल्फरडाईऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसी गैसें भी वातावरण में फैलती हैं। ये मशीन इनकी जांच तो करती हैं लेकिन मशीन सही ढंग से काम कर रही हैं कि नहीं इसकी जांच कोई नहीं करता। डॉ. सक्सेना बताते हैं कि खराब मशीनों से गलत सलत प्रमाण पत्र 50 रुपये में जारी कर दिए जाते हैं। जबकि इसकी जांच करने वाले नदारद हैं।  
- रसोई सिलिंडर से चल रहे ऑटो
आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही के चलते शहर में अभी भी एलपीजी गैस ही नहीं बल्कि सिलिंडर से वाहन चल रहे हैं। जो अपने साथ दूसरों की जान भी जोखिम भी डाल रहे हैं। शहर में जंक्शन व पीलीभीत बाईपास रोड पर खुलेआम ऑटो व स्कूल वैन में एलपीजी गैस भरी जा रही है। यह अवैध रिफलिंग रोड पर चल रही है। कई वाहनाें में तो सिलिंडर भी लगा हुआ होता है।
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