पिछली साल तक उत्तराखंड की बिस्कुट कपंनियों के कमीशन एजेंट किसानों से गांव-गांव संपर्क कर उनका गेंहू खेत में खरीद कर ऊंचे दामों में ट्रकों में भरकर ले जाते थे। इस बार वे भी दगीला व क ाले रंग के धब्बे वाले व कटे हुए दाने की खरीद से हाथ खड़े कर रहे हैं। अभी तक इन बिस्कुट फैक्ट्रियों के ऐजेंटों ने गांव वालों से संपर्क नहीं किया है। एक बिस्कुट कंपनी के कमीशन एजेंट ने बताया कि बिस्कुट कंपनियो ने इस बार साफ सुधरे गेंहू क ा रेट करीब 1540 रुपये तक रखा है।
किसान का गेंहू व्यापारी औने पौने में खरीद कर सरकारी खरीद केंद्र पर सप्लाई किया करते थे लेकिन इस बार व्यापारी भी गांव में गेंहू की खरीद के लिए पहले से पैसा नही बांट रहे हैं। व्यापारियो का कहना है साफ अच्छा गेंहू होगा तो सरकारी रेट से दस रुपये ऊपर तक खरीद कर लेंगे उसमें भी कुछ बैरायटी हैं जैसे कुंदन, लोकवन, 226 आदि। मौसम ठीक रहा तो भी खेतों में नमी होने के कारण गेंहू की फसल को बाजार में आने में करीब पंद्रह रोज का समय लग जाएगा। किसान नमी के समाप्त होने का इंतजार है।
वर्जन-
सर्वे का काम चल रहा है। किसान अपना गेंहू क हीं भी ले जाकर बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। सरकारी खरीद केंद्रो पर बिना चमक वाला व दगीला गेंहू की खरीद करने के कोई आदेश नही आये हैं। शासन से जैसे निर्देश मिलेंगे वैसी ही खरीद होगी। अभी गेंहू की कटाई में भी बीस रोज लग सकते हैं।
- रामेश्वर नाथ तिवारी एसडीएम बहेड़ी।
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गांव में लेखपाल गए ही नहीं कैसा सर्वे!
बहेड़ी। रेतवाड़ा के जगदीश प्रसाद कहते हैं एक एकड़ फसल चौपट हो गई। अभी तक लेखपाल सर्वे करने नहीं आये।ग्राम प्रहलादपुर के किसान ताराचंद्र ने दो एकड़ में से दो बीघा फसल बच पाई । महाजन से कर्ज लेकर पैसा लगाया था। सर्वे करना तो दूर लेखपाल ने गांव में झांक कर नही देखा।
हसनपुर गांव के चेतराम, लालता प्रसाद, प्रसादी लाल ने भी बटाई पर जमीन लेकर दो दो बीघा गेंहू लगाये थे। बहेड़ी के एक सरार्फ के यहां जेवर गिरवी डालकर फसल में लागत लगाई । कहते हैं लागत से कम का मुआवजा मिल रहा है वह भी खेत मालिक को मिलेगा । उन्हें सरकार की इस योजना को कोई फायदा नहंी मिलने वाला। अभी तक गांव में लेखपाल सर्वे करने नहीं आये।
ग्राम मुड़िया नवी बख्श के अब्दुल हमीद ने चार बीघा जमीन बटाई पर लेकर गेंहू की फसल लगाई थी सारी फसल नष्ट हो गई। एक तरफ बेंक का कर्ज दूसरी ओर बच्चो के पेट पालने की चिंता कहते हैं इस बार तो आफत में पड़ गये।उतरसिया मोहलिया के किसान हर्षद्वीप सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बार 35 एकड़ जमीन पर गेंहू की फसल लगाई थी जिसमें से 15 एकड़ पूरी तरह बर्बाद हो गई है। करीब 25सौ रुपये एकड़ का खर्च करने के बाद अब तो लागत भी नहीं निकल पायेगी। शरीफनगर के किसान खूबकरन बताते हैं कि उन्होंने जमीन बटाई पर लेकर 12 बीघा गेंहू की फसल लगाई सारी फसल जमीन पर गिर गई। उसमें दाना नहीं है। आगे बेटी की शादी करनी है। महाजन से कर्ज लेकर गेंहू में लगाया था कर्ज का पैसा भी डूब गया ऊपर से खेत मालिक को एक कुंतल बीघा के हिसाब से अनाज देना होगा। मुआवजे का सर्वे अभी तक तो हुआ नहीं अगर होगा तो उसमें उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला।