भले ही आसपास देखने से न लगता हो, लेकिन शहर की हवा अब जहरीली हो रही है। प्रदूषण के घातक कण न केवल सबसे भीड़ भाड़ वाले इलाके में हैं, बल्कि कैंट जैसे हरे भरे क्षेत्र में भी हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बरेली की हवा और सूरज की खतरनाक किरणाें की जांच की गई। साबित हुआ कि किरणें तो अभी सीधे घातक नहीं हुई हैं लेकिन हवा में प्रदूषण काफी बढ़ गया है।
वाहनों से निकल रहा है घातक धुआं
दिल्ली में दस साल पुराने वाहनों पर रोक लगा दी गई है। दरअसल, वाहन जितने पुराने होंगे उतने खतरनाक होंगे। बरेली कालेज के बॉटनी विभाग के डॉ. डीके सक्सेना बताते हैं कि डीजल वाहनाें से 7.7 क्यूबिक मीटर नाइट्रोजन आक्साइड निकल रहा है जो होना 3.4 चाहिए। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा प्रदूषण तो मानक से अधिक सवारियाें को बैठाने से होता है। ऑटो में तीन से चार यात्री ही बैठ सकते हैं, लेकिन बैठते सात-आठ लोग हैं। इससे सीएनजी वाहन भी खतरनाक गैस रिलीज करता है।
कालोनियां तो अवैध हैं, हरियाली कहां से आएगी
वन विभाग की मानें तो शहर में किसी भी कालोनी या बड़े फ्लैट के आसपास के 20 फीसदी क्षेत्र में हरियाली होनी चाहिए। इसकी जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण की होती है। उन्हें ही कालोनी अप्रूव्ड करने से पहले हरियाली के मानक को भी देखना होता है लेकिन शहर में पहले से ही 250 से अधिक कालोनियां अवैध हैं। जाहिर है यहां हरियाली देखने का समय बीडीए को नहीं है।
घातक कण शरीर के लिए खतरनाक
रिसपेरिबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) यानी घातक कण। जिला चिकित्सालय के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके धस्माना बताते हैं कि आरएसपीएम फेफड़ाें के लिए बहुत नुकसानदायक है। साथ ही वायु में मिला सल्फरडाई आक्साइड व नाइट्रोजन आक्साइड भी सीधे नाक की नली से फे फड़ों में घुसकर अस्थमा, ब्राेंकाइटिस, टीबी का रोगी बनाती है।
कच्चा रखें आंगन मिलेगी तीन सिलिंडर जितनी ऑक्सीजन
बरेली कालेज के डॉ. डीके सक्सेना बताते हैं कि मकान के अंदर और बाहर जमीन पक्का करने से प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है साथ ही धरती का भी दम घुट रहा है। अगर हम 12 गुणा 14 फीट की जगह घर के बाहर कच्चा छोड़ देते हैं तो हमें तीन रसोई सिलिंडर जितनी ऑक्सीजन अतिरिक्त मिलेगी। इसलिए आंगन में घास लगाएं टाइल्स नहीं।
शहर में प्रदूषण की स्थिति
क्षेत्र आरएसपीएम कचरा प्रदूषण
आईवीआरआई 288 4.75
श्यामगंज 261 4.4
कैंट 166 1.2
प्रभा रोड 372 8.7
कुतुबखाना 280 3.2
चौपला 390 10.41
सिविल लाइंस 324 5.3
(नोट: आरएसपीएम यानी रिसपेरिबल सस्पेंडेड पार्टिकु लेट मैटर का मानक 60 से 100 के बीच होना चाहिए। वहीं कचरा प्रदूषण में बैटरी, टायर व इलेक्ट्रानिक सामान से प्रदूषण होता है। इनका मानक मात्र एक है। ये आंकड़े प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को बरेली कालेज ने भेजे हैं।)
पृथ्वी को बचाएं
हरियाली अधिक लगाएं
पानी की बचत करें
घर के आसपास टाइल्स न लगाएं
बिजली कम खर्च करें
कूड़ा सड़क पर न फेंके
प्लास्टिक का प्रयोग बंद करें
कम दूरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पैदल या साइकिल से तय करें