बरसात से पहले शहर के बड़े नालों को जेसीबी से और छोटे नाले नालियों को आउटसोर्सिंग कर्मचारी लगाकर तलीझाड़ करने की रणनीति बनी। बदायूं रोड, सुभाषनगर, जगतपुर, पुराना शहर, एजाज नगर गौंटिया, नई बस्ती आदि इलाकों में जेसीबी ने बड़े नालों के चोक खोलकर सफाई भी की। आधे शहर में नाले नालियों की सफाई अभी भी नहीं हो पाई। जहां नाले साफ भी हुए, वहां लोगों ने दोबारा कूड़ा डालकर उनको फिर से चोक कर दिया। जिस दिन भारी बारिश हुई तो उस दिन चोक नाले नालियां गली कूचों में जलभराव की बड़ी वजह बनेंगे।
हार्टमैन कालेज के आस-पास आधा दर्जन कालोनियों, किला, कोहाड़ापीर, शाहबाद, बानखाना, जाटवपुरा, कुदेशिया फाटक, बिहारीपुर, मढ़ीनाथ, बदायूं रोड, पीलीभीत बाईपास, हरूनगला में एक बार सफाई होने के बाद भी अधिकांश नाले फिर से चोक हो चुके हैं। शाहजहांपुर रोड का नाला भी चोक है। ज्यादातर नाले बिना अतिक्रमण हटाए साफ किए गए। इसलिए ये पूरी तरह साफ ही नहीं हुए।
70 वार्डों में नालियों की सफाई के लिए 34 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया। आउटसोर्सिंग से प्रति वार्ड 15 कर्मचारी 15 दिनों के लिए दिए जाने थे। 80 पार्षदों को प्रतिदिन 12 सौ कर्मचारी कभी भी उपलब्ध नहीं हुए। फिर भी नालियां साफ हो गईं। सफाई निरीक्षकों ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के काम की मानीटरिंग नहीं की। कुछ पार्षदों ने लिखकर दे दिया कि उनके वार्ड की नालियां साफ हो गईं। नगर निगम ने भी इसे ही सच मान लिया। हकीकत ये है कि जेसीबी ने जो नाले साफ कर दिए, बस वही साफ हुए। नालियां अभी भी चोक हैं।
‘बड़े नालों की जेसीबी से सफाई हुई है। कुछ एक जगह रह गई हैं जहां काम चल रहा है। अलग से नाला गैंग भी बनाया गया है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के न पहुंचने की किसी पार्षद ने शिकायत नहीं की। जहां जरूरत होगी, वहां नाला सफाई बरसात भर कराई जाती रहेगी।’ डा. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी