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हर चुनाव में सड़क पर आती है गुटबाजी पर

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लखीमपुर खीरी। पिछले एक महीने में ऐसे चार मामले सामने आ चुके हैं, जब पार्टी की गुटबाजी सड़क पर आ गई। लेकिन संगठन तमाशबीन बना रहा। जिला भाजपा प्रभारी का कहना है कि इस सब के पीछे अराजक तत्व हैं।
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पहला केस: जिलाध्यक्ष और सांसद आए थे आमने-सामने
9 मार्च को खीरी उपनिवेशन संघ जैसे छोटे चुनाव में भाजपा के दो गुटों के बीच हुए बवाल और फायरिंग मामले ने पार्टी की काफी फजीहत कराई। भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील सिंह और खीरी से भाजपा सांसद अजय मिश्र टेनी के बीच रार खुलकर सामने आई। जब अध्यक्ष पद के लिए सांसद पक्ष के वीरेंद्र शुक्ला और जिलाध्यक्ष पक्ष के उमाशंकर मिश्र में भिड़ंत हो गई। मामले में खीरी सांसद ने खुलकर घटना का विरोध कर कार्रवाई की मागं की थी। मामले में भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी जनपद प्रवास के दौरान मामले से कन्नी काट ली थी और अभी तक संघ का अध्यक्ष कोई नहीं बन सका।
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दूसरा केस: पूर्व सांसद पर धमकाने का लगा था आरोप
28 मार्च को पूर्व सांसद और वर्तमान में भाजपा कार्यसमिति के सदस्य जुगुल किशोर का पंचायत चुनाव लड़ने पर एक प्रत्याशी को धमकाने का ऑडियो सामने आया था, जिसमें मितौली ब्लॉक के मदारीपुरवा निवासी गोविंद प्रसाद ने जुगुल किशोर पर पंचायत चुनाव में खड़े होने पर धमकाने का आरोप लगाया था। मामले में उन्होंने जान का खतरा बताते हुए डीएम को मामले में कार्रवाई के लिए शिकायती पत्र दिया था। हालांकि, जुगुलकिशोर ने उसे झूठा बताया था।
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तीसरा केस: विधायक बोले- सपा कार्यकर्ता को पार्टी ने बनाया प्रत्याशी
8 अप्रैल को मितौली प्रथम एवं चतुर्थ से पार्टी की ओर से निर्धारित प्रत्याशी के खिलाफ कस्ता से भाजपा विधायक सौरभ सिंह सोनू की मां दमयंती किशोर व भाई गौरव ने जिला पंचायत सदस्य पद का पर्चा दाखिल किया था। बाद में 11 अप्रैल को पार्टी की सख्ती पर उन्होंने पर्चा वापस ले लिया। मामले में विधायक सौरभ सिंह सोनू का कहना है कि राट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से बातचीत के बाद मां और भाई ने नामांकन वापस लिया। उनका कहना है कि पार्टी ने जिसे प्रत्याशी बनाया है वह सपा का कार्यकर्ता रहा है। पूर्व विधायक का करीबी भी है। उन्होंने बताया कि, उम्मीदवार घोषित करने से पहले न तो उनसे पूछा गया और न ही मंडल अध्यक्ष से, जिसको लेकर नाराजगी थी। इसीलिये मां और भाई ने नामांकन कराया था।
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चौथा केस: भाजपा विधायक और निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख भिड़े
11 अप्रैल को नकहा ब्लॉक परिसर में सदर विधायक योगेश वर्मा की निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख से भिड़ंत हुई थी, जिसमें दोनों ने एक दूसरे का गिरेहबान पकड़कर गाली गलौच की थी। विधायक अपने चहेते कपिल वर्मा की पत्नी अर्चना वर्मा को ब्लॉक प्रमुख बनाना चाहते थे, जिसको लेकर सदर विधायक रविवार को नाम वापसी के दिन नकहा ब्लॉक पहुंचे थे। पवन गुप्ता ने विधायक पर जबरन पर्चा वापसी कराने के लिए प्रत्याशियों को धमकाने का आरोप लगाया था। मामले में देर शाम पवन गुप्ता के भाई संजय गुप्ता पर पिस्टल लहराने पर नामजद और 15-20 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में विधायक का पवन गुप्ता पक्ष के एक व्यक्ति को धमकाने का ऑडियो सामने आया था।
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जो भी घटनाएं हो रही हैं उन सब के बारे में प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराया जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व और हम स्वयं सभी के संपर्क में हैं। लोगों की गलतफहमियों को दूर किया जाएगा। कहीं न कहीं कुछ अराजकतत्व माहौल खराब कर रहे हैं। जल्द ही सब कुछ सामान्य होगा।
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-दिनेश तिवारी जिला प्रभारी
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