बरेली। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील नावेद की हरकत से उसके पड़ोसी भी सकते में हैं। वे यकीन नहीं कर पा रहे कि नावेद इस तरह हत्यारों की मदद कर सकता है। मलूकपुर के जसोली में किराये के घर में रह रहा नावेद का परिवार अब लोगों से नजरें चुरा रहा है। परिवार के लोग बाहर कम निकल रहे हैं। पिता दरगाह पदाधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि वे कानूनी पैरवी कर नावेद को राहत दिला सकें।
दरगाह पर खिदमत करने वाला नावेद रजा सिद्दीकी दरगाह के संगठन टीटीएस से भी जुड़ा है। हाल ही में उसने वकालत का पंजीकरण कराकर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की सदस्यता ली है। नावेद से कमलेश तिवारी के हत्यारों की मदद करने पर लखनऊ में पूछताछ की जा रही है। शुक्रवार को जब अमर उजाला की टीम उसके घर पहुंची तो आसपास के तमाम लोग एकत्र हो गए। घर से उसकी मां जीनत निकलीं। बताया, उनके पति के पूर्वज बदायूं के उझानी कस्बे के मोहल्ला साहूकारा के निवासी थे। वहां बरसों पहले संपत्ति बेचकर पति ने अपने बहनोई के घर के पास पीलीभीत के पूरनपुर कस्बे में ठिकाना बना लिया। बच्चों की पढ़ाई के लिहाज से करीब दस साल से यहां किराये पर रह रहे हैं।
बड़ा बेटा नाजिम फिजियोथैरेपिस्ट है। उससे छोटा नावेद वकील, उससे छोटा शहबाज निजी अस्पताल में कर्मचारी और सबसे छोटा जुबैर इंटर की पढ़ाई कर रहा है। दोनों बेटियां भी पढ़ रही हैं। सफाई दी कि किसी खुराफात से नावेद का कोई मतलब नहीं था, ये सब कैसे हो गया समझ नहीं पा रहे। फोटो न खिंचाने की शर्त पर पड़ोसियों ने भी इसी तरह की बात कही। देर शाम उर्स के कुल से लौटे नावेद के पिता सलीम सिद्दीकी ने बताया कि बेटा हत्यारों की मदद अनजाने में कर गया होगा, या कोई गहरी साजिश की गई है। वह जानकारी जुटा रहे हैं।