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‘स्काडा’ के घोटाले अब विजिलेंस और एसटीएफ के हवाले

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बरेली। ऊर्जा मंत्री ने सपा सरकार में करोड़ों रुपये से हुए विद्युतीकरण और बिजली सप्लाई सुधार के कामों की जांच विजिलेंस और एसटीएफ से कराने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि बरेली और बदायूं में पांच साल पहले हुए कामों का तकनीकी परीक्षण कराकर कार्यदायी संस्था और विभागीय अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी। भ्रष्टाचार पाए जाने पर अफसरों पर कड़ी कार्रवाई भी होगी।
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सर्किट हाउस में बातचीत के दौरान ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि उन्हें पता चला है कि सपा सरकार में बरेली शहर में स्काडा योजना के तहत करीब चार सौ करोड़ रुपये के काम कराए गए थे। इसका कॉन्ट्रैक्ट केईआई कंपनी को दिया गया था जिसने अंडरग्राउंड हाईटेंशन लाइनें डालने के साथ नए खंभे और लाइनों जैसे काम किए थे। उद्देश्य चोरी बिजली वाले इलाकों में बंच केबिल डालकर लाइन लॉस रोकना था लेकिन विभागीय अफसरों की सांठगांठ से खंभे और लाइनें निजी कॉलोनियों में लगा दी गईं। जहां पहले ही खंभे लगे थे वहां बजट खपाने के लिए एक और खंभा लगा दिया। ट्रांसफार्मर कितने और कहां लगे, उनकी अर्थिंग में भी गड़बड़ी मिली है। यही गड़बड़ बदायूं शहर में भी हुई। मार्च 2019 तक सभी केबिलों का भौतिक सत्यापन कर सर्टिफिकेट मांगा था मगर वह भी अफसरों ने फर्जी दे दिया। शिकायत मिली है कि दर्जनों भूमिगत हाईटेंशन लाइनें चालू ही नहीं हुई हैं मगर कंपनी को भुगतान कर दिया गया। विजिलेंस और एसटीएफ जांच के लिए उन्होंने रात में ही पॉवर कारपोरेशन की एमडी अपर्णा यू को आदेश भी दे दिए।
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