बहेड़ी। भाजपा के संचालकों के विरोध को नजरंदाज कर किसानों की मांग पर साधारण सभा की बैठक बुलाने को लखनऊ तक इतना संगीन मामला माना गया कि सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव प्रदीप कुमार वर्मा रातोरात निपट गए। गन्ना मंत्री के दखल के बाद गन्ना आयुक्त के निर्देश पर जिला गन्ना अधिकारी ने रात को ही उनका तबादला आदेश जारी कर दिया जिसके बाद सुबह सचिव के अपने दफ्तर पहुंचते ही बहेड़ी छोड़कर फरीदपुर जाने का फरमान थमा दिया गया। सचिव का कहना है कि कुछ लोग उन्हें किसानों के साथ बेईमानी करने को मजबूर करना चाहते थे। वह नहीं माने तो तबादला करा दिया।
पिछले दिनों गन्ना किसानों की साधारण सभा की बैठक बुलाए जाने के बाद भाजपा के संचालकों ने विरोध शुरू कर दिया था और बैठक निरस्त करने की मांग की थी। इस मुद्दे पर दो संचालक आपस में ही भिड़ गए थे। विरोध के बावजूद बैठक हुई तो सचिव सीधे निशाने पर आ गए। बैठक में ही कुछ सदस्यों और एक डायरेक्टर ने उन पर पानी की बोतल और बिस्कुट के पैकेट तक फेंककर मारे थे। हालांकि काफी हंगामा किए जाने के बाद भी सचिव प्रदीप कुमार वर्मा ने भाजपाइयों का विरोध नजरंदाज कर पुलिस को बुला लिया था और बैठक करा दी थी। भाजपाइयों ने इसके बाद उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। इसी के साथ अंदरखाने उनके तबादले की रणनीति भी बननी शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक यह मामला गन्ना मंत्री तक पहुंचा। इसका नतीजा यह हुआ कि रात में ही जिला गन्ना अधिकारी को गन्ना आयुक्त से सचिव का तबादला करने का निर्देश मिला। बुधवार सुबह जिला गन्ना अधिकारी ने सचिव को तत्काल प्रभाव से फरीदपुर गन्ना समिति में ज्वाइन करने का आदेश थमा दिया।
हड़काया-धमकाया और प्रताड़ित किया, फिर भी किसानों से बेईमानी नहीं की तो कराया ट्रांसफर
सचिव प्रदीप कुमार वर्मा का कहना है भाजपा के डायरेक्टरों का विरोध नजरंदाज कर उन्होंने डेलीगेट सदस्यों की मांग पर साधारण सभा की बैठक कराई थी। किसानों के हित में केसर चीनी मिल पर पिछले सत्र का भुगतान करने का दबाव बना रहे थे और केसर के पांच खरीद केंद्र मीरंगज और पीलीभीत की मिलों को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था। कुछ लोगों को यह ठीक नहीं लगा। दबाव के बाद भी वह किसानों के साथ बेईमानी करने को तैयार नहीं हुए तो इन लोगों ने उन्हें काफी प्रताड़ित किया, फोन कर हड़काया। फिर भी वह न डरे न झुके न किसी से मिलने गए। इसी वजह से उनका तबादला हो गया।