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बंगाली संवासिनी शरणालय से ‘गायब’ तो लंबी फौज का क्या मतलब

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बरेली। कड़ा पहरा होने के बावजूद मानसिक मंदित एक बंगाली महिला राजकीय नारी शरणालय से आखिर कैसे लापता हो गई? इससे नारी शरणालय के स्टाफ की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अपनी गर्दन बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया है। शरणालय की सहायक अधीक्षिका ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और महिला हामगार्ड और दो संविदा कर्मी सहित छह लोगों से स्पष्टीकरण मांगा है।
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पश्चिमी बंगाल की एक 25 वर्षीय युवती मीरगंज में लावारिस मिली थी। मानसिक तौर से कमजोर होने की वजह से युवती अपने घर के बारे में कोई जानकारी ही नहीं दे पा रही थी। अप्रैल में एसडीएम मीरगंज के आदेश के बाद युवती को राजकीय महिला शरणालय में भेजा गया था। 31 अगस्त को यह संवासिनी अचानक लापता हो गई, जबकि सुरक्षा और देखरेख के लिए यहां स्टाफ भी रहता है। शरणालय में स्टाफ की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शरणालय में अधीक्षिका के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और महिला होमगार्ड भी मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद मानसिक मंदित संवासिनी न केवल शरणालय के बाहर पहुंच गई, बल्कि बाद में उसे सही से ढूंढने की कोशिश भी नहीं की गई है। शरणालय के स्टाफ का दावा है कि उन्होंने रोडवेज स्टेशन और रेलवे सहित दूसरी जगहों पर संवासिनी को ढूंढा, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद इसकी सूचना थाना बारादरी पुलिस को भी दे दी गई है। इस मामले में नारी शरणालय की सहायक अधीक्षिका ने नर्सरी शिक्षिका गीतीरानी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोतीलाल, संविदा कर्मी लक्ष्मी व सोनवती, महिला होमगार्ड हीरारानी और बबिता इन सभी को नोटिस देते हुए उनका स्पष्टीकरण मांगा है कि संवासिनी किन परिस्थितियों में शरणालय के बाहर निकली और इसकी किसी को जानकारी क्यों नहीं लगी?

‘राजकीय महिला शरणालय से संवासिनी के लापता होना गंभीर है। इसके लिए कौन लोग लापरवाह है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार से लेकर कार्रवाई की जाएगी।’
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- वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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