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मंत्री जी का दखल था तो अब क्यों याद आया बड़ा बाग मंदिर का चुनाव

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बरेली। वक्त और हालात बदलते हैं तो सबकुछ बदल जाता है। ऐसा ही कुछ वित्त मंत्री का पद छोड़ने के बाद कैंट विधायक राजेश अग्रवाल के साथ हो रहा है। उनके जो विरोधी अब तक उनके रुतबे की वजह से खामोश थे, वे अब मुंह खोलने लगे हैं। उन पर कई साल से बड़ा बाग हनुमान मंदिर ट्रस्ट का चुनाव न कराने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पूर्व वित्त मंत्री करीब आठ साल से मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर जमे हुए हैं। मंदिर कमेटी का चुनाव भी नहीं कराया जा रहा है। यहां तक कि लंबे समय से मंदिर की आय-व्यय की जानकारी कमेटी के सदस्यों को ही नहीं दी जा रही है।
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शहर में हार्टमन इलाके में स्थित प्राचीन बड़ा बाग हनुमान मंदिर की यहां दक्षिणमुखी हनुमान की मूर्ति होने की वजह से काफी मान्यता भी है। इस मंदिर का संचालन बाबा रामदास हनुमान मंदिर ट्रस्ट की ओर से किया जाता है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हाल ही में वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले कैंट विधायक राजेश अग्रवाल है। उनके इस्तीफे के बाद इस ट्रस्ट को लेकर भी हलचल शुरू हो गई है। लोगाें का कहना है कि राजेश अग्रवाल करीब आठ साल से मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। राजनीतिक व्यस्तता के चलते वह मंदिर पर बहुत ध्यान भी नहीं दे पाते हैं लेकिन कमेटी का चुनाव कराने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इस वजह से कमेटी में कोई बदलाव भी नहीं हो पा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि कमेटी में बदलाव के लिए कई बार कमेटी वालों ने ही चुनाव कराने की मंशा जताई लेकिन फिर भी चुनाव नहीं कराया गया। इस बारे में जानकारी के लिए राजेश अग्रवाल को फोन किया तो वह स्विच ऑफ मिला।
दान और खर्च कितना.. किसी को नहीं पता
कमेटी से जुड़े लोगों ने बताया कि हर महीने मंदिर को करीब तीन-चार लाख रुपये का दान मिलता है। पहले कमेटी के सभी सदस्यों को हर महीने मंदिर में आने वाले दान और खर्च का ब्योरा दिया जाता था। मगर अब काफी समय से यह प्रक्रिया बंद कर दी गई है। इसकी वजह से भी कमेटी पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन कोई जवाब देने को तैयार नहीं है।
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ट्रस्ट में शामिल हैं ये लोग
अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल, सचिव नितिन गुप्ता, कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार सेठी और गिरीश कुमार अग्रवाल, महेश चंद्र अग्रवाल, मनोज पंजाबी, नारायन स्वरूप अग्रवाल, निशांत अग्रवाल, एसके अग्रवाल, सुमित अग्रवाल, शशांक अग्रवाल, संजय अग्रवाल, संजीव कुमार अग्रवाल, विजय कुमार अग्रवाल, विशनू अग्रवाल।
सचिव बोले- यह हमारा अंदरूनी मामला
नियमानुसार हर तीन साल में ट्रस्ट के चुनाव होने चाहिए। मंदिर जुड़े तमाम लोग भी यह चाहते हैं ताकि बेहतर देखभाल हो और दूसरे लोगों को आगे आने का मौका मिले लेकिन कोई भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इस बारे में जब ट्रस्ट के सचिव नितिन गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने इसे अंदरूनी मामला बताते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

मंदिर ट्रस्ट का चुनाव समय पर होना चाहिए ताकि लोगों को शिकायत का मौका न मिले लेकिन फिर भी चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मंदिर में आने वाले दान और खर्च की सूचना भी देनी चाहिए। - एसके अग्रवाल, संरक्षक बाबा रामदास हनुमान मंदिर ट्रस्ट
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