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संतोष को याद है.. अरुण जेटली ने उनके चुनाव में लगाए थे पोस्टर

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बरेली। 1984 का वो चुनाव केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को शनिवार को अनायास याद आ गया जब इस चुनाव में उन्हें जिताने के लिए अरुण जेटली भरसक मेहनत की थी। न सिर्फ बरेली आकर कई दिन यहां रुके थे बल्कि उनके लिए वाल पेटिंग और पोस्टर चिपकाने जैसा काम करने में भी संकोच नहीं किया था। संतोष गंगवार को तीन साल पहले तब भी काफी सुखद एहसास हुआ जब अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय में तमाम अधिकारियों के बीच बरेली के अपने अनुभव साझा किए और बरेली को काफी अच्छा शहर बताया।
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संतोष गंगवार ने बताया कि अरुण जेटली 1984 के अलावा दो बार और बरेली में चुनाव के सिलसिले में आए थे। 1974-75 में सबसे पहले जेटली बरेली कालेज छात्र संघ का चुनाव लड़ाने आए थे। उनका केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से 35 साल पुराने संबंध थे। गंगवार का चुनाव लड़ाने जेटली अपनी युवा टीम के साथ आए थे। अपने ही खर्च हफ्तों पर बरेली में डेरा जमाये रखा था और एक आम कार्यकर्ता की तरह सारा काम किया था। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार बताते हैं कि वह और उनकी टीम खुद रात में दीवारों पर पोस्टर चिपकाने निकलती थी। जेटली भी उनके साथ होते थे। तीन साल पहले वित्त मंत्रालय में उन्हें जेटली की मातहती में ही राज्यमंत्री का पद मिला था। तब जेटली ने खुद उन्हें कुर्सी पर बैठाया और खुद खड़े रहे। इस दौरान बरेली के कई अनुभव साझा किए। बरेली की लस्सी और रात में पोस्टर चिपकाने जैसे कई संस्मरण सुनाते हुए बरेली को बेहतर शहर बताया था। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जेटली जी के साथ काम करना काफी खुशगवार रहा। नोटबंदी और जीएसटी जैसे ऐतिहासिक फैसले उनके कार्यकाल में ही हुए। मंत्रालय में सहयोगी मंत्री और स्टाफ के साथ उनका अच्छा व्यवहार था। शनिवार को अरुण जेटली के निधन की खबर आने के बाद संतोष गंगवार अपने स्थानीय कार्यक्रम रद्द कर दिल्ली रवाना हो गए।
अटल ने बताया कुशल छात्र नेता
लोकतंत्र सेनानी वीरेंद्र अटल बताते हैं कि जेटली कुशल छात्र नेता थे। जब वे दिल्ली में छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे तक उनके चुनाव प्रचार में काम करने का मौका मिला और बरेली कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव में भी काफी नजदीकियां रहीं।
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एमबी कॉलेज में बोले थे- एक राष्ट्र में दो झंडे कैसे बर्दाश्त करें
2012 में आए जेटली ने अपनी सभा में उठाया था कश्मीर मुद्दा
बरेली। पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली का बरेली कई बार आना हुआ है। उनके आने-जाने के दौरान कई यादें भी यहां के छोटे-बड़े नेताओं के साथ जुड़ी हुई हैं। वह 18 फरवरी 2012 में आखिरी बार बरेली आए थे। जब वह संसद में नेता प्रतिपक्ष थे और विधान सभा चुनाव के दौरान मनोहर भूषण इंटर कॉलेज में सभा को संबोधित किया था।
उस सभा का भाषण उन दिनों चल रहे सबसे गरम मुद्दे कश्मीर पर था। इस दौरान उन्होंने लोगों से यह भी सवाल किया था कि कश्मीर मुद्दे पर जवाहर लाल नेहरू का पक्ष सही था या डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का और एक ही राष्ट्र में दो झंडे और दो प्रधानमंत्री को कैसे सहन किया जा सकता है। सभा में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, पूर्व वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक डॉ. अरुण कुमार, पूर्व मंत्री डॉ. दिनेश जौहरी आदि मौजूद रहे। सभा के बाद वह भाजपा के संजय नगर कार्यालय पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं से भी मिले।
होटल में लस्सी मंगवाकर पी
अरुण जेटली 2012 में जब बरेली आए तो उन्हें एक होटल में ठहराया गया था। वहां संतोष गंगवार समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे। उन्होंने अपने एक पुराने कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पूछा कि तब उनके कुछ साथी उन्हें बरेली में एक लस्सी की दुकान पर ले गए थे, जहां उन्होंने लस्सी पी थी, वह अब है या नहीं। इस पर लोगों ने हां कहते हुए उसी दुकान से उनके लिए लस्सी मंगवा कर उन्हें पिलाई थी। याद को ताजा करते हुए भाजपा नेता पुष्पेंदु शर्मा ने बताया कि जब लस्सी मिट्टी के कुल्हड़ में आई तो उन्होंने कहा, पहले शीशे के गिलास में मिला करती थी।
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