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आलमपुर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित

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आंवला/ भमोरा। नौ माह बाद आलमपुर जाफराबाद के ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर दूसरी बार एसडीएम अरुण कुमार सिंह की निगरानी में शनिवार को मतदान हुआ। इसमें परिणाम पिछली बार जैसा ही रहा। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पहले के मुकाबले एक मत अधिक पड़ा।
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ब्लॉक में 112 क्षेत्र पंचायत सदस्यों में से एक की मौत के बाद अब 111 सदस्य हैं। शनिवार को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में 111 में से 93 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसमें 88 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष ने मतदान किया। पक्ष में सिर्फ तीन ने ही वोट डाले। दो सदस्यों के मत निरस्त हो गए। इस दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। एसडीएम फरीदपुर विशु राजा, सीओ रामप्रकाश के अलावा अलीगंज, बिशारतगंज और आंवला कोतवाली की पुलिस मौजूद रही।
मतदान से पहले ही ब्लॉक प्रमुख ने दिया इस्तीफा
आंवला। आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ छह जनवरी, 2019 को क्षेत्र पंचायत सदस्य वेदप्रकाश यादव अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। उस समय 90 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया था। इनमें से 87 ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष और दो ने विपक्ष में मतदान किया था। एक मत निरस्त हो गया था, लेकिन मतदान प्रक्रिया के खिलाफ ब्लॉक प्रमुख आदेश सिंह यादव उच्च न्यायालय चले गए। अदालत ने शॉर्ट नोटिस पर मतदान कराने की बात मानते हुए मतदान प्रक्रिया रद्द कर दी और दोबारा मतदान कराने का आदेश जिला प्रशासन को दिया। डीएम के आदेश पर शनिवार को मतदान हुआ, लेकिन ब्लॉक प्रमुख आदेश सिंह यादव ने अपनी हार निश्चित मानकर पहले ही डीएम को इस्तीफा दे दिया। इस दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य वेदप्रकाश यादव ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को साथी सदस्यों ने अपना समर्थन देकर उन पर विश्वास जताया है। यह सच्चाई की जीत है। इधर, आदेश सिंह यादव ने कहा कि जिले में धारा 144 लगी होने से उनके समर्थक मुस्लिम सदस्यों ने आने से मजबूरी जताई थी, इसीलिए उन्होंने इस्तीफा डीएम को सौंप दिया। सवाल किया कि जब उनके इस्तीफा देने से सीट ही रिक्त हो गई तो फिर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान क्यों कराया गया?
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अविश्वास प्रस्ताव की खबर में जोड़
- अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अधिक मत पड़ने से ब्लॉक प्रमुख का पद रिक्त होने की सूचना शासन को भेज दी गई है। ब्लॉक प्रमुख ने इस्तीफा जिलाधिकारी को सौंपा है, जो मान्य नहीं है। नियमानुसार जिला पंचायत अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपा जाना चाहिए था। इसकी सूचना भी उन्हें दे दी गई है। - धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
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