दूसरे अभ्यर्थी के नाम में मामूली अंतर
जांच में पता लगा कि दानिश का रोल नंबर 00514749 है, जो एजेंसी के दिल्ली मुख्यालय के मुताबिक 00575905 दर्शाया जा रहा है। इस पर विस्तृत जांच में सामने आया कि दूसरे नंबर पर भी दानिश नाम का ही अभ्यर्थी परीक्षा दे रहा था। उस दानिश की सीट भी इसी दानिश के कमरा नंबर 15 में थी। बस दूसरे दानिश के नाम की स्पेलिंग में बाद में एच नहीं था। चूंकि कॉलेज को मिले रिकॉर्ड में केवल रोल नंबर ही थे और परीक्षा खत्म होने के बाद अभ्यर्थी निकल चुके थे तो तात्कालिक रूप से दूसरे दानिश का पता नहीं लगाया जा सका।
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साक्ष्य मिले तो आगे बढ़ेगी विवेचना
अब इसकी जांच हो रही है। बुधवार को भी विवेचक ने कॉलेज पहुंचकर प्राचार्य पंकज शर्मा से जरूरी दस्तावेज लिए ताकि इस दानिश के खिलाफ मामला खत्म किया जा सके। प्रभारी थानाध्यक्ष केवी सिंह का कहना है कि दूसरे दानिश के खिलाफ एजेंसी की जांच रिपोर्ट आई तो पुलिस कार्रवाई को आगे बढ़ा सकती है। तब उच्चाधिकारियों से निर्देश लेंगे कि इसी मुकदमे को आगे बढ़ाएं या फिर उसके खिलाफ नई रिपोर्ट दर्ज की जाए।
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मुरादाबाद का अभ्यर्थी होने से बढ़ा शक
चूंकि दानिश मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा से ताल्लुक रखता है, इसलिए एजेंसी के अधिकारियों का संदेह और बढ़ गया। उसी दिन एसटीएफ ने जो कार्रवाई की थी, उसमें बिहार के सॉल्वरों को मुरादाबाद व ठाकुरद्वारा इलाके के शातिर सेट करके लाए थे। इसलिए माना जा रहा था कि दानिश भी उसी कड़ी का हिस्सा है।
एजेंसी की कारगुजारी से रातभर परेशान रहा : दानिश
दानिश ने मोबाइल फोन पर वार्ता में अमर उजाला को बताया कि एजेंसी के सॉफ्टवेयर की गलती या कर्मचारियों की चूक की वजह से वह रातभर परेशान हुआ। कहा कि कॉलेज में मौजूद एजेंसी का स्टाफ प्रारंभिक जांच में उसे सही मान रहा था लेकिन दिल्ली से निर्देश दे रहे एजेंसी के अधिकारियों के दबाव में कॉलेज प्रशासन ने उसे फर्जी अभ्यर्थी मान लिया।
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एसएसपी प्रभाकर चौधरी तक मामला पहुंचने पर पुलिस-प्रशासन ने उसकी मदद की, वरना वह फंस ही जाता। एएसपी व एसडीएम ने उसके बयान दर्ज किए। गनीमत रही कि उसकी परीक्षा हो चुकी थी। उसे हवालात में भी बंद नहीं किया गया। रात में पुलिसकर्मियों के साथ कमरे में रहा लेकिन उसके परिजन व रिश्तेदार काफी घबरा गए थे।