मगर, एम खान अस्पताल की डायग्नोसिस रिपोर्ट में तुतने के बजाय फाइमोसिस की समस्या दर्ज है। इसके इलाज के लिए सूक्ष्म शल्य क्रिया यानी खतना के लिए बच्चे के परिजन से 12 सौ रुपये फीस ली गई। वहीं, अस्पताल में तुतने के ऑपरेशन के छह हजार रुपये फीस होती है। डायग्नोसिस पर बच्चे के परिजन के हस्ताक्षर भी हैं।
परिजनों के पास लिखित प्रमाण नहीं
लिहाजा, जांच टीम अंतिम रिपोर्ट तैयार करते समय असमंजस की स्थिति में है। परिजन तुतने के इलाज की बात कह रहे हैं, लेकिन इसका लिखित प्रमाण उनके पास नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट में फाइमोसिस के इलाज के चलते ऑपरेशन की बात लिखी है। सीएमओ के मुताबिक सभी पक्षों के बयान, दस्तावेज आदि की जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बृहस्पतिवार को उच्चाधिकारियों से मंथन के बाद शासन को भेजेंगे।