खुद बनाते थे तमंचे, दो आरोपी खरीदकर बेचते थे
पूछताछ में रामगोपाल और अवधेश ने पुलिस को बताया कि वे अवैध तमंचे बनाने और पुराने तमंचों की मरम्मत का काम करते थे। तैयार हथियारों को अच्छे दाम पर बेचकर मुनाफा कमाते थे। वहीं योगेंद्र और रजत ने बताया कि वे दोनों से तमंचे बनवाकर कम कीमत में खरीदते थे और आगे अधिक कीमत पर बेच देते थे।
पुलिस के अनुसार योगेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ बदायूं के सिविल लाइंस थाने में एक मुकदमा पहले से दर्ज है। रजत प्रताप सिंह उर्फ शंकर पर सिविल लाइंस थाने में एक और उसावां थाने में एक मुकदमा दर्ज है। बाकी दोनों आरोपियों के खिलाफ आंवला में अवैध शस्त्र बरामदगी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
आर्म्स एक्ट में मुकदमा, कार भी सीज
चारों आरोपियों के खिलाफ आंवला थाने आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद ब्रेजा कार को एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत सीज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बुधवार को एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने प्रेसवार्ता कर कार्रवाई की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, बरामद हथियारों के संबंध में आरोपी कोई वैध लाइसेंस या प्राधिकार पत्र नहीं दिखा सके। मामले में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर अवैध हथियारों के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।