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बरेलीः डीआईजी ने 13 पुलिस अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेजा, खराब रिकॉर्ड वाले हैं सभी

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डीआईजी राजेश पाण्डेय - फोटो : facebook
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योगी सरकार में दागदार और नाकारा स्टाफ को समय से पहले रिटायर करने की नीति के तहत डीआईजी ने बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर के सात इंस्पेक्टर और दरोगा की सेवा समाप्त कर दी है। एसएसपी ने भी छह पुलिसकर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है।

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डीआईजी की रेंज स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी में अंतिम रूप से सात लोगों के नाम तय किए गए। इनमें फरीदपुर सीओ के स्टेनो का काम देख रहे इंस्पेक्टर ब्रह्मपाल सिंह, बदायूं में तैनात दरोगा नेमपाल सिंह, रोहिल हुसैन, विजयपाल सिंह, शाहजहांपुर में तैनात दरोगा अशोक कुमार विश्वकर्मा, सत्येंद्र कुमार मलिक और शाहजहांपुर में ही लिपिक वर्ग में तैनात एएसआई जयकिशन के नाम शामिल हैं। पीलीभीत जिले से रेंज की लिस्ट में किसी कर्मचारी का नाम नहीं आया है। डीआईजी कार्यालय से शनिवार को इनकी लिस्ट जारी कर दी गई। वहीं, एसएसपी ने जिले के छह पुलिसकर्मियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया है। इनमें एसआई विशेष श्रेणी महेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल नागरिक पुलिस शिवकुमार सिंह, कांस्टेबल नन्हकी लाल, प्रीतम सिंह, अयूब खां और गंगाराम शामिल हैं। इन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पत्र रिसीव करा दिए गए हैं। कमेटी में में एसएसपी बरेली, एसपी सिटी बदायूं आदि सदस्य थे।

रिकार्ड में दर्ज हैं कारनामे
अनिवार्य सेवानिवृत्ति वाले सभी पुलिसकर्मी बेहद खराब रिकार्ड वाले हैं। इनके कारनामे इनकी सर्विस बुक से लेकर विभाग के रिकार्ड में दर्ज हैं। सभी की उम्र पचास साल से ज्यादा है। किसी की तीन तो किसी की सात साल की नौकरी बची है। इस सेवाकाल में ही इनको कई कई बैड एंट्री मिल चुकी हैं। इन पर अधिकारी से अभद्रता, किसी पर पब्लिक से झगड़ा करने, जरूरत से ज्यादा अवकाश लेने, अफसरों की बात न मानने, कर्मचारी सेवा नियमावली का पालन न करने और गबन जैसे आरोप हैं।
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रिकार्ड साफ था तो बचा बवाली स्टाफ
पुलिस लाइन में डाले गए कई सिपाही और हेड कांस्टेबल ड्यूटी टाइम में शराब पीने और ऊधम काटने के लिए चर्चित हैं। इनकी ड्यूटी लगाते हुए भी आरआई को डर लगता है कि कहीं तैनाती स्थल पर बवाल न कर दें। कई तो सुबह से ही सुरूर में दिखते हैं। शासन की इस स्कीम के बहाने अफसरों ने इनको बाहर का रास्ता करने पर भी विचार किया, लेकिन इनका सर्विस रिकार्ड काफी साफ मिला। उसमें इन पर इक्का दुक्का कार्रवाई ही थीं। इसलिए कमेटी को इन्हें कार्रवाई के दायरे से बाहर करना पड़ा।

‘शासन के निर्देश पर स्क्रीनिंग कमेटी ने काफी मंथन के बाद चुनिंदा कर्मचारियों पर यह कार्रवाई की है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के रूप में सभी प्रभावित कर्मचारियों को तीन महीने के एडवांस वेतन के साथ रिटायरमेंट की अन्य सभी सुविधाएं दी जाएंगी।’
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- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी रेंज

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