व्यापारियों ने बताया कि वे इस मांझे को नहीं बेचते पर गली-मोहल्ले की दुकानों पर मुनाफे के चक्कर में इसे बेचा जाता है। इस पर रोकथाम के लिए हरियाणा की संबंधित फैक्टरी को बंद कराने की जरूरत है। कोतवाल ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उनके इलाके में मांझा बिकता मिला तो वह कार्रवाई करेंगे।
खुली रहीं दुकानें, चाइनीज मांझा गायब
पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान चाइनीज मांझा बेचने वालों पर कार्रवाई की थी। इसके काफी समय बाद एकाएक हुई कार्रवाई से मांझा विक्रेताओं में खलबली मच गई। यही वजह रही जो बांस मंडी व किला बाजार की कुछ दुकानें बंद रहीं। जो दुकानें खुली थीं, उन पर पतंग और सामान्य मांझा ही रखा मिला।
देश में ही होता है निर्माण, चाइनीज नाम से पहचान
जिस चाइनीज मांझे को लेकर इतनी हायतौबा मची है, उसमें कुछ भी चाइनीज नहीं है। दरअसल इस मांझे में तांत (नायलॉन) के ऊपर कांच समेत केमिकल की परत चढ़ा दी जाती है। इससे पतंग उड़ाने पर उसके कटने की आशंका कम हो जाती है। मांझा एसोसिएशन से जुड़े इनाम अली ने बताया कि देसी मांझे को लोग पसंद नहीं करते। देसी मांझे की छह रील की चरखी 600 रुपये में मिलती है, जबकि चाइनीज मांझे की चरखी सिर्फ 150 रुपये में ही मिल जाती है।
सीओ प्रथम पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि चाइनीज मांझे से इंसानों को ही नहीं पक्षियों को भी खतरा रहता है। बेजुबान तो बिना इलाज के ही मर जाते हैं। इसी लिहाज से कार्रवाई की गई है। चुनाव के बाद फोर्स के लौटने पर इसे अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।