बच्चों की सांस फूलने लगे तो इलाज में देर न करें
डॉ. करमेंद्र के मुताबिक इम्यूनिटी कम होने की वजह से बच्चों में सर्दी, खांसी होना आम है। पर इन बीमारियों के साथ तेज बुखार हो और पसीना निकले, सांस फूलने लगे, बच्चा रात में सो न सके, सूखी खांसी आए या दस्त होने लगे, उल्टी हो तो बिल्कुल भी देर न करें। डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि यह निमोनिया और कोल्ड डायरिया का संकेत है।
हालत बिगड़े तो पहुंचे अस्पताल
केस 1- बेनीपुर चौधरी निवासी रामनिवास का एक साल के बेटे में निमोनिया की पुष्टि हुई है। पिता के मुताबिक करीब सप्ताह भर से हल्की खांसी, बुखार था। स्थानीय मेडिकल स्टोर से सिरप दे रहे थे। दो दिन पहले हालत बिगड़ी तो जिला अस्पताल पहुंचे।
पांच दिन से थी सूखी खांसी
केस 2- कांधरपुर की मीना देवी की आठ वर्षीय बेटी लक्ष्मी को पांच दिन से सूखी खांसी थी और सांस फूल रही थी। परिजन मेडिकल स्टोर से पैरासिटामॉल टैबलेट और कफ सिरप दे रहे थे। हालत बिगड़ी तो जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर निमोनिया की पुष्टि हुई है।
स्थानीय चिकित्सक से ली दवा
केस 3- करगैना निवासी प्रीति के छह वर्षीय बेटा निमोनिया की चपेट में है। परिजन के मुताबिक बेटा दूध नहीं पी रहा था। बुखार और सर्दी थी। स्थानीय चिकित्सक को दिखाकर दवा ली पर कोई सुधार नहीं हुआ। अब निमोनिया का पता चला है। दवा चल रही है।
बचाव के उपाय
- सर्दी, खांसी है तो नाक, मुंह ढंकने के लिए रूमाल का प्रयोग करें।
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। हाथ धोते रहें।
- गुनगुना पानी, तरल पदार्थ का सेवन करें। पौष्टिक आहार लें।
- बच्चों, बुजुर्गों को ठंड से बचाएं। तबियत बिगड़े तो डॉक्टर को दिखाएं।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि एचएमपीवी के मामले देश में मिले हैं, लेकिन जिले में अभी कोई मरीज नहीं मिला है। अगर कोई मरीज मिलेगा तो बेहतर इलाज के इंतजाम हैं। संदिग्ध निमोनिया, कोल्ड डायरिया के चपेट में जो बच्चे मिल रहे हैं, उनका इलाज हो रहा है। घबराने की जरूरत नहीं है।