आरोपियों ने लिया था 38 हजार का चेक
सीधे घूस लेने से बचने के लिए राजीव गंगवार ने दया के साथ मिलकर योजना बनाई थी। दया ने राजकुमार से जो रकम मंगाई, वह 38 हजार रुपये राजकुमार से उसी के खाते में जमा करा दिया। इन लोगों ने राजकुमार से अपनी चेकबुक लाने के लिए भी कहा था। फिर दया ने ही राजकुमार से कहा कि वह अपने ही खाते से 38,000 रुपये चेक से निकाले। इसी चेक को देते समय टीम ने दया और फिर राजीव को पकड़ लिया।
बरेली का निवासी है प्रबंधक, किराये के कमरे की भी तलाशी
बैंक शाखा प्रबंधक राजीव गंगवार मूल रूप से बरेली जिले के फरीदपुर थाने के मेहतरपुर गांव का निवासी है। वह सहसवान में ही किराये पर कमरा लेकर रहता है। कार्रवाई के बाद रात में टीम ने उसे साथ ले जाकर कमरे की तलाशी ली। बैंक कर्मचारी दयाराम उर्फ दया बदायूं जिले के ही जरीफनगर थाने के गांव धर्मपुर टप्पा वैश्य का निवासी है। बैंक प्रबंधक की सभी स्थानीय डील वही कराता था।
पीड़ित ने मेसेज से दी थी सूचना
चूंकि केंद्रीय सेवा से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को घूसखोरी के मामलों में पकड़ने के लिए सीबीआई ही अधिकृत है। इसलिए भ्रष्ट बैंक स्टाफ को पकड़वाने के लिए राजकुमार ने उन्हें सूचना दी। राजकुमार ने बताया कि वह केवल हाईस्कूल पास हैं। खुद बेरोजगार हैं तो इतनी बड़ी रकम घूस में देने की उनकी क्षमता नहीं थी। उनके मोबाइल फोन पर इस संबंध में मेसेज आते थे। इसी आधार पर उन्होंने सीबीआई से संपर्क किया। बुधवार रात सीबीआई ने लखनऊ शाखा में ही यह केस दर्ज कर लिया। आरोपी भी लखनऊ जेल भेजे जा सकते हैं।