फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: शहर के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान

Sat, 29 Aug 2026 12:19 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। खेलों के प्रति शहर के युवाओं में जुनून की कमी नहीं है। कई उम्रदराज खिलाड़ी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। ये खिलाड़ी तीरंदाजी, सेपक टाकरा, शतरंज और कॉर्फ बॉल जैसे खेलों में शहर को पहचान दिला रहे हैं।
विज्ञापन



विश्वास तीरंदाजी में लहराया परचम
फतेजगंज पूर्वी के निवड़िया गांव के रहने वाले विश्वास शर्मा बचपन से ही आश्रम पद्धति गुरुकुल में पढ़े। वहीं उन्होंने तीरंदाजी का ककहरा सीखा। बाद में फौज में भी नौकरी की। वर्ष 1998 में आर्चरी का जूनियर वर्ल्ड कप जीता, 2003 में म्यांमार में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। वर्ष 2006 में दोहा (कतर) में हुए एशियन गेम्स में पहला ब्रांज मेडल जीता। वर्ष 2018 में एशियन गेम्स जकार्ता में प्रतिभाग कर छठी रैंक प्राप्त की। 2020 के ओलंपिक में भी चयन हुआ था, लेकिन कोविड की वजह से आयोजन रद्द हो गया। वर्ष 2023 में सन्यास के बाद वह प्रदेश सरकार के साथ जुड़कर खिलाड़ियों को परीक्षण दे रहे हैं। विश्वास की बहन सुमंगला भी वर्ष 2004 की ओलंपियन रही हैं। दोनों भाई-बहन को प्रदेश सरकार से लक्ष्मण पुरस्कार भी मिल चुका है।



छह साल की उम्र में शिवा ने हासिल की फिडे रेटिंग

शहर के छह वर्षीय शिवा मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) की स्टैंडर्ड, रैपिड और ब्लिट्ज तीनों में आधिकारिक रेटिंग हासिल की है। वह राज्य के सबसे कम उम्र के ऐसे खिलाड़ी बने। उन्होंने स्टैंडर्ड में 1512, रैपिड में 1550 और ब्लिट्ज में 1513 रेटिंग प्राप्त की है। शिवा के पिता शशांक मिश्रा ने उसे साढ़े चार साल की उम्र में शतरंज सिखाया था। इसका उद्देश्य उसे डिजिटल दुनिया से दूर रखना और मानसिक विकास करना था। महज दो महीने के अभ्यास के बाद शिवा ने अपने पिता को हरा दिया। यह खेल जल्द ही उसका जुनून बन गया।
विज्ञापन



लकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीता स्वर्ण

श्यामगंज इलाके के युवा सेपक टाकरा खिलाड़ी लकी ने सीमित संसाधनों और विषम पारिवारिक परिस्थितियों को मात देकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है। पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को धूल चटाकर स्वर्ण पदक जीतने वाले लकी ने हाल ही में गुजरात में आयोजित खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में भी अपनी टीम को कांस्य पदक दिलाया है। यह खेल अब युवाओं के लिए रोजगार का एक सशक्त जरिया भी बनता जा रहा है। एक साल के भीतर शहर के 20 से अधिक खिलाड़ियों ने खेल कोटे से सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। इनमें दो प्रतिभावान महिला खिलाड़ी चंचल और सुषमा भी शामिल हैं। उनका चयन सीमा सुरक्षा बल में हुआ है।


पारस मिश्रा ने एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का किया प्रतिनिधित्व
17 वर्षीय पारस मिश्रा ने थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में कॉर्फ बॉल भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उनकी टीम ने प्रतियोगिता में छठवां स्थान हासिल किया। अलखनाथ मंदिर के पास के रहने वाले पारस पहले वालीबॉल खिलाड़ी थे। उन्होंने कोच की सलाह पर कॉर्फ बॉल अपनाया। पिछले साल अंडर-19 नेशनल प्रतियोगिता में उन्हें असफलता मिली तो छह महीने तक कड़ी मेहनत की। इस साल जून में पंजाब में नेशनल खेलने के दौरान उनका चयन ट्रायल के लिए हुआ। 15 से 23 जुलाई तक पंजाब में आयोजित विशेष कैंप के बाद पारस को भारतीय टीम में जगह मिली। 26 से 31 जुलाई तक चली चैंपियनशिप में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें